तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में एक अजीबोगरीब और शोकमग्न कर देने वाली घटना ने एक युवा जीवन की चमक को हमेशा के लिए मिटा दिया. यहां चींटियों से जबरदस्त डर लगने वाली 25 वर्षीय एक विवाहिता मनीषा ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली. अपने पति और मासूम बच्ची को पीछे छोड़कर उसने जो कदम उठाया, उसने पूरे परिवार को तबाह कर दिया. यह घटना तेलंगाना राज्य के अमीनपुर नगरपालिका क्षेत्र के सर्व होम्स में घटी, जहां मनीषा अपने पति श्रीकांत और बेटी अन्वी के साथ रहती थी.

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माइर्मेकोफोबिया नाम की मनोवैज्ञानिक स्थिति से जूझ रही थी मनीषा

मनीषा को माइर्मेकोफोबिया नाम की एक गंभीर मनोवैज्ञानिक बीमारी थी, जिसमें व्यक्ति को चींटियों से असहनीय डर लगता है. यह सिर्फ एक सामान्य डर नहीं, बल्कि एक ऐसी बीमारी थी जिसने उसके जीवन को नरक बना दिया था. परिवार ने इस मनोवैज्ञानिक समस्या को लेकर उसका इलाज कराया, काउंसलिंग का सहारा लिया, लेकिन डर का ऐसा गहरा साया उस पर छा गया था कि उसे इससे बाहर निकाल पाना असंभव सा लग रहा था.

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पत्नी ने नहीं खोला कमरे का दरवाजा तो पति ने पड़ोसियों की मदद से तोड़ा

मंगलवार (4 मंगलवार, 2025) की शाम जब उसके पति श्रीकांत काम से लौटे, तो घर में पसरी खामोशी ने उन्हें चिंतित कर दिया. बेडरूम का दरवाजा अंदर से बंद था. काफी बुलाने और दरवाजा खटखटाने पर भी जब कोई जवाब नहीं मिला, तो पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया, तो मनीषा पंखे से लटकी हुई थी. कमरे के अंदर का दृश्य देखकर मनीषा का पति दहल गया.

तेलंगाना पुलिस को मिला मनीषा का सुसाइड नोट

तेलंगाना पुलिस को कमरे में मनीषा का एक सुसाइड नोट मिला, जो उसके दर्द की कहानी बयां कर रहा था. उसने अपने पति को संबोधित करते हुए लिखा, ‘श्री.. आई एम सॉरी, मैं इन चींटियों के साथ नहीं जी सकती हूं.’ अपनी बेटी अन्वी के लिए मां का आखिरी संदेश था- ‘बेटी अन्वी का ध्यान रखना.’ मनीषा के सुसाइड नोट ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है.

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