अकेले तेलंगाना की कितनी है आबादी? SEEPC सर्वे में राज्य की जनसंख्या के आंकड़े आए सामने
Telangana: तेलंगाना की आबादी को लेकर SEEPC ने आंकड़े जारी किए हैं. इनमें राज्य के सामाजिक ढांचे को रेखांकित किया गया है. राज्य की कुल जनसंख्या के आंकड़े भी सामने आए हैं.

Telangana Political & Cast Survey: तेलंगाना में सोशल, इकोनॉमिक, एजुकेशनल, पॉलिटिकल एंड कास्ट सर्वे (SEEPC) के तहत आंकड़े जारी किए हैं. इन आंकड़ों में राज्य के सोशल स्ट्रक्चर को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है. सर्वे के मुताबिक, राज्य की कुल जनसंख्या 3,54,77,554 दर्ज की गई है. इसमें विभिन्न सामाजिक वर्गों की हिस्सेदारी और उनकी आंतरिक संरचना पर विस्तार से विश्लेषण किया गया है.
राज्य में ओबीसी ही सबसे बड़ी आबादी
रिपोर्ट की मानें तो पिछड़ा वर्ग (OBC) राज्य की सबसे बड़ी आबादी के रूप में उभरा है. मुस्लिम अल्पसंख्यकों को छोड़कर ओबीसी वर्ग की जनसंख्या 1,64,09,179 है. यह कुल आबादी का 46.25 प्रतिशत है.
वहीं, OBC मुस्लिमों की संख्या 35,76,588 (10.08%) है. इस तरह कुल मिलाकर पिछड़ा वर्ग की हिस्सेदारी आधे से अधिक के करीब पहुंचती है. यह राज्य की सामाजिक और राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है.
अनुसूचित जाति (SC) की जनसंख्या 61,84,319 है. यह 17.43 प्रतिशत है. जबकि, अनुसूचित जनजाति (ST) की आबादी 37,05,929 (10.45%) दर्ज की गई है. ये दोनों वर्ग सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाओं के केंद्र में रहने वाले महत्वपूर्ण समुदाय हैं.
मुस्लिम अल्पसंख्यकों की कुल कितनी आबादी?
मुस्लिम अल्पसंख्यकों की कुल जनसंख्या 44,57,012 है. यह 12.56 प्रतिशत है. इसमें OBC मुस्लिमों के अलावा 8,80,424 (2.48%) ऐसे लोग भी हैं, जो अन्य वर्ग (OC) श्रेणी में आते हैं. यह आंकड़ा दर्शाता है कि मुस्लिम समाज भी एकसमान नहीं है. बल्कि उसमें भी सामाजिक-आर्थिक विविधता मौजूद है. अन्य वर्ग की कुल जनसंख्या 56,01,539 (15.79%) है. इनकी जनसंख्या 47,21,115 (13.31%) है. इस वर्ग की हिस्सेदारी भी राज्य की सामाजिक संरचना में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
सर्वे में पता चला कि राज्य की जनसंख्या संतुलित नहीं
इस सर्वे से एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है. तेलंगाना की जनसंख्या पूरी तरह संतुलित नहीं है, बल्कि विभिन्न वर्गों के बीच स्पष्ट अंतर मौजूद है. यही कारण है कि भविष्य में आरक्षण, संसाधनों के वितरण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर यह डेटा निर्णायक भूमिका निभा सकता है.
एक्सपर्ट्स की मानें तो SEEPC सर्वे केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि नीति निर्माण का आधार है. इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि किन वर्गों को अधिक ध्यान और संसाधनों की जरूरत है. यह रिपोर्ट आने वाले समय में सामाजिक न्याय, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आर्थिक नीतियों को दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकती है.
यह भी पढ़ें: 'दक्षिण के राज्यों को सीटों का होगा फायदा, फैलाया जा रहा भ्रम', लोकसभा में अमित शाह ने समझाया परिसीमन का पूरा गणित
Source: IOCL

























