तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में शुक्रवार को तेलंगाना राज्य कैबिनेट ने पूर्व की बीआरएस सरकार द्वारा शुरू किए गए 'धरणी' भूमि रिकॉर्ड पोर्टल में अनियमितताओं की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का फैसला किया है. यह समिति पोर्टल के शुभारंभ के बाद से हुए हर लेन-देन की जांच करेगी. इसमें एक फॉरेंसिक ऑडिट भी शामिल होगा, जिससे बड़े पैमाने पर हुए कथित भूमि हस्तांतरणों के पीछे अनधिकृत म्यूटेशन और लॉगिन का पता लगाया जा सकेगा.
धरणी पोर्टल पिछले 2 वर्षों से तेलंगाना की राजनीति में विवाद का केंद्र बना हुआ है. इससे पहले की समितियों को प्रारंभिक साक्ष्य मिले थे कि सरकारी, सीलिंग और इनाम भूमि में बदलाव कर उन्हें निजी हाथों में हस्तांतरित किया गया. शुक्रवार के फैसले से यह जांच विभागीय समीक्षा से आगे बढ़कर एक पूर्ण जांच और फॉरेंसिक प्रक्रिया में बदल गई है.
इस प्रक्रिया का मकसद ये पता लगाना है कि किस अधिकारी ने कब और किस आईपी एड्रेस से रिकॉर्ड्स में बदलाव किए, ताकि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जा सकें. बुनियादी ढांचे को लेकर कैबिनेट ने देवादुला, सीतारामा और पालमुरु-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं की लागत अनुमानों में बढ़ोतरी को मंजूरी दी, जो वित्त विभाग की आपत्तियों के चलते लंबित थी.
मुख्यमंत्री ने दिया था आश्वासनयह संशोधन 2 जुलाई की कैबिनेट बैठक में भी प्रमुखता से उठा था, जब सिंचाई मंत्री ने मंजूरी में देरी की ओर इशारा किया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने इसे प्राथमिकता पर लिए जाने का आश्वासन दिया था. इसके अलावा कैबिनेट ने शिक्षा विभाग में रिक्त पदों को भरने की हरी झंडी दी और पंचायतों को वित्तीय राहत देने के उपायों को भी मंजूरी दी. SIT के गठन, धरणी ऑडिट को पूरा करने की समय सीमा और सिंचाई परियोजनाओं की संशोधित लागत के आंकड़ों को लेकर राज्य सरकार से और जानकारी का इंतजार है.
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