तेलंगाना के जुबली हिल्स उपचुनाव के दौरान राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा भूचाल आया है, जहां भारत राष्ट्र समिति (BRS) के वरिष्ठ नेता और प्रमुख उम्मीदवार मागंटि गोपीनाथ के बेटे तारक प्रद्युम्न ने चुनाव आयोग (ECI) में एक सनसनीखेज शिकायत दर्ज कराकर सबको हैरान कर दिया है.

तारक ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि वही गोपीनाथ के असली और कानूनी वारिस हैं और उन्होंने अपने पिता की निजी जिंदगी से जुड़े ऐसे खुलासे किए हैं, जिनसे न केवल एक पारिवारिक विवाद सामने आया है, बल्कि गोपीनाथ के राजनीतिक भविष्य पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं. यह शिकायत चुनाव के मद्देनजर एक बड़ा विस्फोटक माना जा रहा है, क्योंकि इसमें उनके पिता के चुनावी हलफनामे की सत्यता पर भी सवाल खड़े किए गए हैं.

पिता के खिलाफ बेटे ने क्या लगाए आरोप?

तारक प्रद्युम्न की ओर से चुनाव आयोग को दी गई शिकायत में कई गंभीर आरोप शामिल हैं. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि उनके पिता मागंटि गोपीनाथ ने सुनीता से शादी नहीं की है, जैसा कि सार्वजनिक रूप से प्रचारित किया जाता है.

तारक के अनुसार, ये दोनों केवल लिविंग रिलेशनशिप में थे और उनके बीच वैवाहिक बंधन कानूनी तौर पर कभी भी स्थापित नहीं हुआ. यह आरोप इसलिए और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि गोपीनाथ ने अपने चुनावी हलफनामे में सुनीता को अपनी पत्नी के रूप में घोषित किया है, जिस पर तारक ने आपत्ति जताई है और इसे तथ्यों से भिन्न बताया है. उन्होंने आयोग से इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है.

तारक ने शिकायत में किया बड़ा खुलासा

शिकायत का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि तारक ने अपनी मां मालिनीदेवी के संबंध में भी एक बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने दावा किया है कि मागंटि गोपीनाथ ने उनकी मां मालिनीदेवी को कभी भी कानूनी तौर पर तलाक नहीं दिया. इसका मतलब है कि अगर तारक के दावे सच हैं, तो गोपीनाथ और सुनीता का रिश्ता कानूनी रूप से अमान्य है, क्योंकि उनकी पहली शादी अभी भी बरकरार है.

इस बात को सामने रखते हुए तारक ने यह सवाल भी उठाया है कि जब उनके पिता ने सुनीता से शादी ही नहीं की, तो वह अपने चुनावी हलफनामे में उन्हें अपनी 'पत्नी' के रूप में कैसे घोषित कर सकते हैं. यह सीधे-सीधे चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ एक गंभीर उल्लंघन है, जिसमें गलत सूचना देने पर उम्मीदवार का नामांकन रद्द भी हो सकता है.

पारिवारिक विवाद को सार्वजनिक करने के पीछे उद्देश्य क्या?

तारक प्रद्युम्न का यह कदम सिर्फ एक पारिवारिक विवाद को सार्वजनिक मंच पर लाना नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा संघर्ष और विरासत को लेकर चल रही लड़ाई की बू आ रही है. उनका 'मैं ही असली वारिस हूं' वाला बयान इस ओर इशारा करता है कि यह मामला सिर्फ निजी संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक संपत्ति और राजनीतिक विरासत को लेकर भी तनाव चरम पर है.

अब सभी को चुनाव आयोग की कार्रवाई का है इंतजार

एक बेटे की ओर से अपने पिता के खिलाफ इस तरह का सार्वजनिक और कानूनी कदम उठाना, वह भी चुनाव के संवेदनशील दौर में, राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है. अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और इस पूरे मामले का असर मागंटि गोपीनाथ के राजनीतिक करियर और उनकी उम्मीदवारी पर क्या पड़ता है.

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