तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद धर्मपुरी अरविंद ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर बयानबाजी का नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए उन पर सीधे तौर पर तुष्टीकरण का गंभीर आरोप लगाया है. अरविंद ने चौंकाने वाली टिप्पणी करते हुए कहा कि सोमवार को  तेलंगाना मे होने वाली बैठक मे मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी कैबिनेट की बैठक शुरू करने से पहले सिर पर टोपी पहनेंगे और 'कलमा' पढ़कर बैठक का आगाज करेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अपनी कुर्सी बचाने के लिए एमआईएम (MIM) के दबाव में आकर राज्य को गिरवी रख चुकी है.

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अरविंद ने अपने इस बयान के माध्यम से तेलंगाना में बदलते राजनीतिक माहौल पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार खुद को किसी एक विशेष पार्टी या मजहब के दबाव में रखेगी, तो कैबिनेट के फैसले राज्य की जनता के हित में कैसे होंगे? उन्होंने कहा कि जनता ने रेवंत रेड्डी को विकास और प्रगति के लिए चुना था, लेकिन वे वोट बैंक की राजनीति में इस कदर उलझ गए हैं कि राज्य का मूल ढांचा और संस्कृति खतरे में पड़ गई है. सांसद ने 'निज़ाम संस्कृति' के पुनरुद्धार का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि भाजपा इस तरह के गठजोड़ और मतदाताओं को बांटने वाली राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेगी और सड़क से लेकर संसद तक इसका विरोध जारी रखेगी.

यह बयान उस समय आया है जब राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्ष के बीच 'ध्रुवीकरण' को लेकर तनाव पहले से ही बना हुआ है. धर्मपुरी अरविंद का यह हमला कांग्रेस सरकार के उन कदमों के बाद और तीखा हुआ है, जिन्हें भाजपा अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की संज्ञा दे रही है. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आगामी दिनों में तेलंगाना की सियासत में 'हिंदुत्व' और 'तुष्टीकरण' के मुद्दे केंद्र में रहेंगे. अभी तक इस गंभीर आरोपों पर मुख्यमंत्री कार्यालय या कांग्रेस प्रभारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस बयान ने राज्य की राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है.

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