इस राज्य में एनालॉग पनीर पर लगा बैन, बेचते पकड़े गए तो होगा एक्शन!
राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग की तरफ से इस कार्रवाई के बाद आधिकारिक बयान जारी कर कहा गया कि यह कार्रवाई तेलंगाना की जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा के मकसद से यह अहम कदम उठाया गया है.

- तेलंगाना में आर्टिफिशियल पनीर के उत्पादन, बिक्री पर प्रतिबंध।
- जन स्वास्थ्य हेतु, यह प्रतिबंध एक वर्ष तक लागू रहेगा।
- असली डेयरी पनीर पर कोई प्रतिबंध नहीं, उसकी बिक्री जारी।
- सुप्रीम कोर्ट ने पैक्ड फूड जानकारी देरी पर FSSAI से सवाल।
तेलंगाना के फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट के कमिश्नर ने पूरे राज्य में नॉन-डेयरी या आर्टिफिशियल पनीर (जिसे आमतौर पर एनालॉग पनीर कहा जाता है) के बनाने, प्रोसेस करने, स्टोर करने, बांटने, ट्रांसपोर्ट करने और बेचने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है. विभाग ने राज्य की जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा के मकसद से यह अहम कदम उठाया गया है.
अगले एक साल तक लागू रहेगी रोक
जानकारी के मुताबिक, फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की तरफ से यह कार्रवाई फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 30(2)(a) के तहत गुरुवार (10 सितंबर, 2026) को की गई है और यह रोक 10 सितंबर से शुरू होकर अगले एक साल तक लागू रहेगी.
तेलंगाना गजट के एक खास एडिशन में छपी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि यह रोक पब्लिक हेल्थ के हित में लगाई गई है और इस आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति पर एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी.
विभाग ने अपने आदेश में क्या कहा?
राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग ने अपने आदेश में यह साफ किया है कि नोटिफिकेशन में किसी भी ऐसी चीज पर रोक नहीं लगाई गई है, जो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत बने नियमों के अनुसार खास तौर पर स्टैंडर्डाइज़्ड है और जिसे उसके तय नाम और शर्तों के तहत कानूनी रूप से बनाया और बेचा जाता है. यह कार्रवाई सिर्फ उन चीजों पर की गई है, जो जनता के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. इसका मतलब है कि असली डेयरी पनीर और दूसरे स्टैंडर्डाइज़्ड प्रोडक्ट बाजारों में सामान्य रूप से मिलते रहेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से पूछा सवाल
वहीं, देश के सर्वोच्च अदालत ने पैक्ड फूड में ज्यादा चीनी, नमक और फैट की जानकारी उपभोक्ताओं को देने में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाया है. इस संबंध में कोर्ट ने FSSAI से इस बारे में कई सवाल भी पूछा है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि बच्चों और बाकी लोगों के स्वास्थ्य को राष्ट्रीय हित के अहम विषय की तरह लिया जाना चाहिए.
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