‘मुसलमान न हिजाब छोड़ेंगे और न भारत’, अकबरुद्दीन ओवैसी की चेतावनी, अपनी बेटी का क्यों किया जिक्र?
Akbaruddin Owaisi: AIMIM नेता ने कहा कि हिजाब पहनी मेरी बेटी परीक्षा पास करेगी और पुलिस अधिकारी बनेगी और जल्द ही जूनियर अधिकारी हिजाब पहनी इस IPS अधिकारी को सैल्यूट करेंगे.

- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ नारे को समुदाय की शिक्षा से तुलना की।
AIMIM नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने हिजाब का विरोध करने वालों को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने ऐलान किया कि जो लोग हमारा हिजाब छीनना चाहते हैं, वे ध्यान से सुन लें. हम अपना फर्ज, अपनी सुन्नत, अपनी नफ्ल नमाजें, अपनी मस्जिदें, अपनी शरीयत, अपने चेहरे की सुन्नत या अपना हिजाब छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं.
भारत छोड़ने के किसी भी सुझाव को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, ‘यह मुल्क हमारा था, हमारा है और हमारा ही रहेगा. हम हिजाब में जिएंगे, अपनी दाढ़ी रखेंगे, दुनिया में मुकाबला करेंगे और कामयाब होकर उभरेंगे.’ उन्होंने ये बातें एक वीडियो संदेश में कही, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
पुराने शहर की लड़कियों को सिविल सेवाओं के लिए स्पॉन्सर करने का वादा
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में AIMIM नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने अपनी बेटी के बारे में भावुक होकर बात की, जो एक बैरिस्टर है. उन्होंने उसे अपने दिल की धड़कन, अपना हौसला और अपनी ताकत कहा. इसके बाद उन्होंने हैदराबाद के पुराने शहर में स्थित अकबर ओवैसी जूनियर कॉलेज या उसके डिग्री कॉलेज में पढ़ने वाली हर लड़की के लिए एक सार्वजनिक प्रस्ताव रखा.
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ओवैसी ने कहा, ‘अगर यहां बैठी कोई भी लड़की अपनी पढ़ाई के बाद बैरिस्टर बनना चाहती है, तो बस मुझे बता दे, मैं उस लड़की को बैरिस्टर बनाऊंगा.’ उन्होंने पढ़ाई की फीस, रहने और खाने-पीने समेत सभी खर्च उठाने का वादा किया. उन्होंने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि पुराने शहर की गलियों से बैरिस्टर, IAS, IPS, IFS और IRS अधिकारी निकलें.’
हिजाब पहनी मेरी बेटी परीक्षा पास करेगीः ओवैसी
ओवैसी ने भरोसा जताया कि सालार-ए-मिल्लत एजुकेशनल ट्रस्ट इन्हीं गलियों से सिविल सेवक तैयार करेगा. उन्होंने इसे अपना सपना बताते हुए कहा, ‘हिजाब पहनी मेरी बेटी परीक्षा पास करेगी और पुलिस अधिकारी बनेगी और जल्द ही जूनियर अधिकारी हिजाब पहनी इस IPS अधिकारी को सैल्यूट करेंगे.’
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ नारे को लेकर क्या कहा?
हिजाब की आलोचना के जवाब में ओवैसी ने अपने समुदाय के नजरिए की तुलना लोकप्रिय नारे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से की. उन्होंने कहा कि जहां दूसरे लोग सिर्फ नारे लगाते हैं, वहीं उनके समुदाय ने हिजाब और बुर्का दोनों को कायम रखते हुए शिक्षा और पेशों में शीर्ष स्थान हासिल किए हैं.
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