तमिलनाडु में विजय के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद एक बार फिर राजनीति उफान पर है. एक तरफ टीवीके ये कह रही है कि राज्य में स्थायी सरकार है तो वहीं दूसरी तरफ पक्ष और विपक्ष लगातार एक-दूसरे पर विधायकों के खरीद फरोख्त का आरोप लगा रहा है. टीवीके ने बुधवार (1 जुलाई 2026) को राज्य के पूर्व मंत्री वी सेंथिल बालाजी पर आरोप लगाया कि वह सरकार को गिराने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं डीएमके ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय और MDMK चीफ वाइको ने डीएमके के दो विधायकों को तोड़ने की साजिश रची.
पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया
टीवीके विधायक एन इलायाराजा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि थिरुनावुक्करासु नाम के एक शख्स ने उनसे संपर्क किया था और विधानसभा स्पीकर के खिलाफ आने वाले अविश्वास प्रस्ताव में वोट देने के लिए कहा था. शिकायत के मुताबिक, ऐसा करने के बदले में इलायाराजा को 35 करोड़ रुपये देने का लालच दिया गया. पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए थिरुनावुक्करासु समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. इन सभी पर टीवीके पार्टी के विधायकों को पैसे का लालच देकर खरीद फरोख्त का आरोप है.
सरकार गिराना चाहते स्टालिन: TVK
पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक नरेश ने चेन्नई में सेंथिल बालाजी के भाई वी. अशोक कुमार से मुलाकात की थी. बयान में कहा गया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि थिरुनावुक्करासु ने विधायक इलायाराजा से सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार की तरफ से ही संपर्क किया था. इसे लेकर राज्य के मंत्री आर. निर्मल कुमार ने सवाल उठाया कि आखिर पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन टीवीके सरकार को गिराने के लिए इतने उतावले क्यों हैं?
उन्होंने दावा किया कि सिर्फ इलायाराजा ही नहीं, बल्कि टीवीके के कई अन्य विधायकों से भी इन आरोपियों ने संपर्क किया था और उन्हें पाला बदलने के लिए 50 करोड़ रुपया ऑफर किया था. इसी बीच डीएमके के सेक्रेटरी आर.एस. भारती ने राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर को एक शिकायत सौंपी. इसमें उन्होंने सीएम विजय पर डीएमके के दो विधायकों को दबाव डालकर उनसे इस्तीफा दिलवाने का आरोप लगाया. ये दोनों विधायक एमडीएमके के थे, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में डीएमके के 'उगते सूरज' चिन्ह पर चुनाव लड़ा था.
डीएमके का TVK पर बड़ा आरोप
डीएमके नेता भारती ने एमडीएमके के महासचिव वाइको के बयान का हवाला देते हुए कहा कि विजय ने एमडीएमके को कहा था कि अगर उनके दो विधायक अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं तो वह उपचुनाव में उनके लिए प्रचार करेंगे और उनकी जीत सुनिश्चित कराएंगे. हालांकि बाद में MDMK ने डीएमके गठबंधन का साथ छोड़कर TVK को समर्थन दे दिया था. इसके बावजूद दोनों विधायकों- कडयनल्लूर से टी. एम. राजेंद्रन और सीरकाली से सेंथिलसेल्वन ने अपने पदों से इस्तीफा नहीं दिया.
'विधानसभा में DMK की संख्या कम करने की कोशिश'
डीएमके नेता ने अपनी शिकायत में कहा, 'विजय ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वाइको को आश्वासन दिया था कि अगर ये दोनों विधायक इस्तीफा दे देते हैं तो वे आगामी उपचुनावों में फिर से निर्वाचित हो जाएंगे और सरकार आर्थिक सहायता भी प्रदान कर सकती है. यह आश्वासन विधायकों की खरीद-फरोख्त का स्पष्ट प्रयास है.' उन्होंने इसे विधानसभा में डीएमके की संख्या कम करने का प्रयास बताया. इस मामले को लेकर भारती ने डिटेल जांच की मांग करते हुए शिकायत डीवीएसी को भी भेजी.
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