सत्ता की दहलीज पर विजय: 10 बड़े ट्विस्ट, जिन्होंने तमिलनाडु की CM पोस्ट की रेस को बना दिया 'पॉलिटिकल थ्रिलर'
Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला, जहां अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई.

Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु की राजनीति में शुक्रवार का दिन बेहद नाटकीय रहा. अभिनेता से नेता बने विजय एक समय मुख्यमंत्री की कुर्सी के बेहद करीब दिखाई दिए, लेकिन रात होते-होते सत्ता का पूरा गणित बदल गया. सरकार गठन को लेकर दिनभर गठबंधन, समर्थन, जोड़तोड़, लापता विधायक, डिप्टी सीएम पद की सौदेबाजी और बैकडोर बैठकों का दौर चलता रहा. तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के लिए जो दिन ऐतिहासिक जीत जैसा शुरू हुआ था, वह देर रात तक राजनीतिक सस्पेंस और अनिश्चितता में बदल गया.
पहला ट्विस्ट: सबसे बड़ी पार्टी बनी TVK, लेकिन बहुमत से रह गई दूर
TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया. हालांकि विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता था, इसलिए प्रभावी संख्या 107 मानी जा रही है. कांग्रेस के 5 विधायक, CPI के 2 और CPI(M) के 2 विधायकों के समर्थन से आंकड़ा 116 तक पहुंचा, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 सीटों से पार्टी अभी भी दो सीट पीछे रह गई. दिनभर TVK नेताओं और समर्थकों को भरोसा था कि VCK और IUML का समर्थन मिलते ही विजय आसानी से बहुमत साबित कर देंगे.
दूसरा ट्विस्ट: राज्यपाल से मिले विजय, लेकिन सिर्फ 116 विधायकों का समर्थन
सूत्रों के मुताबिक विजय ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की. बताया गया कि उन्होंने 116 विधायकों के समर्थन पत्र ही सौंपे. बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं होने के कारण राज्यपाल कार्यालय में भी स्थिति को लेकर संशय बना रहा.
तीसरा ट्विस्ट: विजय के घर के बाहर जश्न, शपथ ग्रहण की चर्चा तेज
जैसे-जैसे समर्थन की खबरें आने लगीं, विजय के पनायुर स्थित घर के बाहर समर्थकों ने पटाखे फोड़कर जश्न मनाना शुरू कर दिया. पार्टी कार्यकर्ता शनिवार सुबह संभावित शपथ ग्रहण समारोह की चर्चा करने लगे. कुछ घंटों तक TVK खेमे में जीत जैसा माहौल रहा, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर कायम नहीं रह सकी.
चौथा ट्विस्ट: VCK बना सत्ता की चाबी
पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) सबसे अहम खिलाड़ी बनकर उभरी. VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने शुरुआती संकेत दिए थे कि उनकी पार्टी वाम दलों की तरह TVK को समर्थन दे सकती है. पार्टी ने इस मुद्दे पर ऑनलाइन बैठक भी की, लेकिन शाम होते-होते VCK ने बयान जारी कर कहा कि मीडिया में विरोधाभासी खबरें चल रही हैं और अंतिम फैसला शनिवार सुबह घोषित किया जाएगा. औपचारिक समर्थन पत्र नहीं मिलने से TVK खेमे की चिंता बढ़ गई.
पांचवां ट्विस्ट: थिरुमावलवन से संपर्क के लिए घंटों कोशिश
सूत्रों के मुताबिक TVK नेताओं ने बहुमत का आंकड़ा पूरा करने के लिए कई घंटों तक थिरुमावलवन से संपर्क करने की कोशिश की. बताया गया कि VCK प्रमुख ने शाम के दौरान TVK नेताओं, AIADMK प्रमुख ईपीएस और DMK नेताओं से लगातार बातचीत की. हालांकि सार्वजनिक तौर पर समर्थन के संकेत देने के बावजूद देर रात तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई.
छठा ट्विस्ट: डिप्टी CM पद की मांग पर फंसा मामला
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई कि VCK ने समर्थन के बदले थिरुमावलवन के लिए डिप्टी मुख्यमंत्री पद की मांग रखी. सूत्रों के अनुसार TVK शहरी विकास मंत्रालय देने को तैयार थी, लेकिन डिप्टी CM पद को लेकर सहमति नहीं बन सकी. बताया जा रहा है कि इसी वजह से समर्थन की घोषणा में देरी हुई.
सातवां ट्विस्ट: IUML ने TVK से बनाई दूरी
शुरुआत में माना जा रहा था कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) भी TVK को समर्थन दे सकती है, लेकिन बाद में पार्टी ने साफ कर दिया कि वह DMK नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ ही रहेगी. पार्टी ने कहा, “हम कल भी DMK के साथ थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे.” इस बयान ने विजय के बहुमत के समीकरण को और मुश्किल बना दिया.
आठवां ट्विस्ट: ‘कंसेंसस CM’ की चर्चा से बढ़ा सियासी तनाव
दिनभर चली बैठकों और बातचीत के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई कि कहीं थिरुमावलवन को सर्वमान्य मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने की कोशिश तो नहीं हो रही. सूत्रों के अनुसार कुछ राजनीतिक हलकों में यह दावा किया गया कि EPS और DMK प्रमुख एमके स्टालिन किसी बड़े समझौते पर विचार कर रहे हैं. हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई. इन चर्चाओं के बाद विजय का मुख्यमंत्री बनना भी पूरी तरह तय नहीं माना जा रहा था.
नौवां ट्विस्ट: फिर शुरू हुई ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ और लापता विधायक की चर्चा
राजनीतिक अस्थिरता के बीच विधायकों की खरीद-फरोख्त और रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की चर्चाएं फिर तेज हो गईं. खबर सामने आई कि कांग्रेस के चार विधायक हैदराबाद चले गए हैं. इसी बीच AMMK प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने दावा किया कि उनके विधायक कमराज लापता हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक का फोन बंद है और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा. दिनाकरन ने राज्यपाल से तत्काल जांच की मांग की. इसके बाद राज्यपाल ने डीजीपी को विधायक का पता लगाने के निर्देश दिए और शनिवार के संभावित शपथ ग्रहण कार्यक्रम को भी रोक दिया गया.
दसवां ट्विस्ट: फर्जी समर्थन पत्र और बीजेपी पर आरोप
टीटीवी दिनाकरन ने TVK पर आरोप लगाया कि पार्टी ने उनके विधायक कमराज के फर्जी हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र इस्तेमाल किया है. इसके जवाब में TVK ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें कथित तौर पर कमराज समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर करते दिखाई दिए. बावजूद इसके दिनाकरन ने पार्टी के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी. वहीं CPI(M) और CPI ने विजय को समर्थन देने को लोकतंत्र और जनादेश बचाने की लड़ाई बताया. CPI(M) महासचिव एमए बेबी ने आरोप लगाया कि बीजेपी राज्यपाल कार्यालय के जरिए जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने दावा किया कि DMK ने AIADMK को बाहर से समर्थन देने की संभावना पर विचार किया था, ताकि विजय को सत्ता से रोका जा सके. हालांकि वाम दलों ने इसका विरोध किया.
देर रात तक जारी रहा सस्पेंस
शुक्रवार देर रात तक तमिलनाडु की राजनीति में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो सकी. एक तरफ विजय मुख्यमंत्री बनने के बेहद करीब दिखे, तो दूसरी तरफ गठबंधन की अनिश्चितता ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक थ्रिलर में बदल दिया. अब सभी की नजरें अगले राजनीतिक फैसलों और समर्थन घोषणाओं पर टिकी हैं, जो तय करेंगी कि तमिलनाडु की सत्ता आखिर किसके हाथ में जाएगी.























