तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय गुरुवार को राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश करेंगे. इस प्रस्ताव के जरिए केंद्र सरकार से तमिल को मद्रास हाई कोर्ट की मुख्य भाषा के तौर पर मान्यता देने की मांग की जाएगी. सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी है.
प्रस्ताव में तमिल भाषा की खास स्थिति और अदालतों में इसके इस्तेमाल को लेकर हुई प्रगति का जिक्र किया जाएगा. सरकार का मानना है कि तमिल को मद्रास हाई कोर्ट में ज्यादा जगह मिलने से राज्य के लोगों के लिए कानूनी प्रक्रिया को समझना आसान हो सकता है.
तमिल को हाई कोर्ट की भाषा बनाने की मांग
मुख्यमंत्री विजय की ओर से पेश किए जाने वाले प्रस्ताव में केंद्र सरकार से तमिल को मद्रास हाई कोर्ट की मुख्य भाषा के तौर पर मान्यता देने की अपील की जाएगी. विधानसभा में इस प्रस्ताव पर चर्चा भी हो सकती है. सरकार प्रस्ताव में तमिल के क्लासिकल भाषा के दर्जे का भी उल्लेख करेगी. इसके साथ ही कानूनी कामकाज के लिए तमिल में तैयार की गई शब्दावली और भाषा के विकास को भी सामने रखा जाएगा.
तकनीक से आसान होगा कानूनी अनुवाद
प्रस्ताव में अदालत के कामकाज में तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं का भी जिक्र होने की उम्मीद है. सरकार तकनीक की मदद से होने वाले अनुवाद को इसका एक उदाहरण मान रही है. इससे तमिल में कानूनी दस्तावेजों और अदालती कामकाज को समझने में मदद मिल सकती है. खासकर उन लोगों के लिए यह उपयोगी हो सकता है जो अंग्रेजी में कानूनी भाषा को आसानी से नहीं समझ पाते हैं.
विधानसभा में हो सकती है चर्चा
राज्य सरकार के प्रस्ताव के बाद विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है. प्रस्ताव का मुख्य मकसद केंद्र सरकार से तमिल को मद्रास हाई कोर्ट की मुख्य भाषा के तौर पर मान्यता देने की मांग करना है. अब सबकी नजर विधानसभा में होने वाली चर्चा और केंद्र सरकार के रुख पर रहेगी.
