शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल के CEO मनोज अग्रवाल को बनाया मुख्य सचिव तो आया कांग्रेस का रिएक्शन, कहा- भाजपा को फायदा पहुंचाने...
बीजेपी ने बंगाल में पहली बार सरकार बनाई है. हाल में हुए विधानसभा चुनाव में BJP ने TMC को करारी शिकस्त दी. BJP को 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में 207 पर जीत मिली जबकि TMC 80 सीट पर सिमट गई.

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है. 1990 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी मनोज अग्रवाल ने विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लीड किया था. चुनाव अधिकारी को मुख्य सचिव नियुक्त किए जाने पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया आई है.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस नियुक्ति को चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत और सांठगांठ को दिखाती है. उन्होंने एक्स पर लिखा, 'भाजपा के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की निगरानी करने वाले पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल को पश्चिम बंगाल सरकार का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है. इसी तरह मतदाता सूची से नाम हटाने और मतदाता सूची की निगरानी के लिए नियुक्त विशेष मतदाता सूची पर्यवेक्षक सुब्रता गुप्ता को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया है.'
The BJP led West Bengal government has appointed the erstwhile Chief Election Officer, Mr. Manoj Agarwal (IAS 1990), responsible for overseeing the 2026 West Bengal assembly election as the new Chief Secretary to the Government of West Bengal. Similarly, Mr. Subrata Gupta (IAS…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) May 11, 2026
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उन्होंने लिखा, 'ये नियुक्तियां चुनाव आयोग और भाजपा के बीच स्पष्ट मिलीभगत और सांठगांठ को दर्शाती हैं. अब इस मिलीभगत को गुप्त रखने या छिपाने का कोई प्रयास भी नहीं किया जा रहा है. ये नियुक्तियां इस बात का प्रमाण हैं कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं था और उसने केवल भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए काम किया. पूरे राज्य में 27 लाख लोगों को मतदान से वंचित रखते हुए चुनाव कराए गए. यह चुनाव आयोग द्वारा भाजपा को चुनावी लाभ दिलाने के लिए चतुराई से किया गया था.'
बंगाल में कई पदों पर रह चुके हैं मनोज अग्रवाल
आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र मनोज अग्रवाल अपने करियर में कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं. उन्होंने बंगाल सरकार के कई प्रमुख विभागों में सेवाएं दी हैं. इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है. अधिकारियों के अनुसार उन्होंने राज्य राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया और कोना एक्सप्रेसवे पर प्रस्तावित महत्वपूर्ण एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना तैयार की.
कोरोनाकाल में निभाई थी बड़ी जिम्मेदारी
राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अग्रवाल ने कोविड-19 महामारी के समय सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्य कूपन वितरण की जिम्मेदारी सरकार के जनप्रतिनिधियों के बजाय सरकारी अधिकारियों को सौंपने का निर्देश दिया था. उनका यह रुख कथित तौर पर तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार को पसंद नहीं आया. इसके बाद अग्रवाल को राज्य वन विभाग में ट्रांसफर कर दिया गया, लेकिन बाद में उन्हें राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया.
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मनोज अग्रवाल के नेतृत्व में हुआ था बंगाल का चुनाव
इस पद पर रहते हुए उन्होंने एसआईआर की जिम्मेदारी संभाली, जिसे भाजपा ने 'मतदाता सूची का आवश्यक शुद्धिकरण अभियान; बताया, जबकि टीएमसी ने इसे 'भाजपा के इशारे पर वैध मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की सोची-समझी कोशिश करार दिया. हालांकि अग्रवाल इसी साल जुलाई में रिटायर होने वाले हैं, लेकिन राज्य सचिवालय के सूत्रों के अनुसार उन्हें सेवा विस्तार मिलने की लगभग पूरी संभावना है. बता दें कि SIR के दौरान करीब 91 लाख वोटर्स के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे.
बीजेपी ने बंगाल में पहली बार सरकार बनाई है. हाल में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त दी. भाजपा को 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में 207 सीट पर जीत मिली जबकि टीएमसी 80 सीट पर सिमट गई.























