सुप्रीम कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि अगर कोई उम्मीदवार परीक्षा के किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ लेता है तो वह सामान्य श्रेणी की सीट पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता, भले ही उसके अंक या रैंक सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से बेहतर क्यों न हो. यह फैसला मंगलवार (6 जनवरी 2026) को जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने सुनाया. कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया.

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवार को सामान्य श्रेणी के कैडर में नियुक्त करने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट का तर्क था कि संबंधित उम्मीदवार ने अंतिम मेरिट सूची में सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से बेहतर रैंक हासिल की थी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले से असहमति जताई और कहा कि चूंकि उम्मीदवार ने प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ लिया था, इसलिए वह अनारक्षित (General) सीट पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

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शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अगर कोई उम्मीदवार परीक्षा के किसी भी चरण चाहे वह प्रारंभिक परीक्षा हो या अन्य में आरक्षण की छूट का लाभ लेता है तो वह परीक्षा नियम 2013 के तहत सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों की सूची में शामिल नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बाद के चरणों में बेहतर प्रदर्शन करने मात्र से आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार सामान्य श्रेणी की सीट पर दावा नहीं कर सकता.

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा 2013 से जुड़ा है. परीक्षा तीन चरणों में हुई थी—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार. प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य श्रेणी का कटऑफ 267 अंक था, जबकि अनुसूचित जाति श्रेणी के लिए यह 233 अंक तय किया गया था. SC उम्मीदवार जी. किरण ने 247.18 अंक प्राप्त कर आरक्षित कटऑफ के आधार पर परीक्षा पास की, जबकि सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार एंटनी एस. मारियप्पा ने 270.68 अंक के साथ जनरल कटऑफ पार किया.

मेरिट में आगे होने के बावजूद जनरल सीट नहीं मिली

अंतिम मेरिट सूची में जी. किरण की रैंक 19 रही, जबकि एंटनी की रैंक 37 थी, लेकिन कैडर आवंटन के समय कर्नाटक में केवल एक जनरल इनसाइडर वैकेंसी उपलब्ध थी और कोई SC इनसाइडर वैकेंसी नहीं थी. केंद्र सरकार ने यह जनरल इनसाइडर सीट एंटनी को दी, जबकि जी. किरण को तमिलनाडु कैडर आवंटित किया गया. इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है.

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