तमिलनाडु के सीएम विजय ने सितंबर 2025 में करूर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति देने की घोषणा की गई थी. मद्रास हाईकोर्ट ने इसे अनुकंपा नियुक्तियों से जुड़े स्थापित कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ बताया था और इसे रद्द कर दिया था. मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.  सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी है.

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असंवैधानिक करार दिया था

मद्रास हाई कोर्ट ने भगदड़ पीड़ितों के परिवारों को दी गई अनुकंपा नियुक्तियों को असंवैधानिक करार दिया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को तुरंत आर्थिक राहत देना है. इसे किसी सार्वजनिक त्रासदी के बाद सामान्य पुनर्वास उपाय के रूप में नहीं माना जा सकता. खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत अपनी कार्यकारी शक्ति की सीमा का उल्लंघन किया है. कार्यकारी शक्ति हमेशा अनुच्छेद 14 और 16 में दिए गए अधिकारों के अधीन रहनी चाहिए.

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क्या है मामलाकरूर में सिंतबर 2025 में हुई टीवीके की रैली में भगदड़ से 41 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद सीएम विजय की सरकार ने मुआवजे के तौर पर मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया था. 10 जुलाई को सीएम विजय ने करूर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे थे.

मद्रास हाई कोर्ट के राज्य सरकार के फैसले को रद्द करने के बाद आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी. जहां से उन्हें बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है.

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