नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों में कम उम्र के बाल गवाहों को गवाही की इजाजत दी जा सकती है, बशर्ते वह इतना समझदार हो कि सवालों को समझ कर उनका तार्किक जवाब दे सके. जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की एक पीठ ने कहा कि बाल गवाह से सवाल जवाब कर घटना को समझने और अदालत के सामने सच बोलने की उसकी बौद्धिक क्षमता को सुनिश्चित किया जा सकता है.

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि बाल गवाह उस स्थिति में ही अक्षम होता है जब अदालत को यह लगता है कि वह सवालों को नहीं समझ पाएगा और सही तरीके से जवाब नहीं देगा. इसके साथ ही बाल गवाह की क्षमता को सुनिश्चित करने के लिये जस्टिस को अपनी राय भी बनानी होगी.

सुप्रीम कोर्ट हत्या के एक मामले में अपील की सुनवाई कर रहा था जिसमें अभियोजन के दो गवाह नाबालिग थे. इस दौरान बेंच ने यह आदेश दिया.

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