नई दिल्ली: आने वाले दिनों में अदालती कार्रवाई का सीधा प्रसारण देख पाना संभव हो सकता है. कोर्ट की कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. हालांकि, कोर्ट ने साफ किया है कि फिलहाल इसे प्रायोगिक तौर पर ही लागू करने पर विचार किया जा रहा है. यानी शुरुआत चुनिंदा कोर्ट के कुछ चुनिंदा मामलों से होगी.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने एटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से मामले में सहायता करने का आग्रह किया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वो वो बार एसोसिएशन और दूसरे पक्षों से राय मांगें. अपने और दूसरे पक्षों के सुझाव के आधार पर कोर्ट में एक नोट पेश करें.

आज वेणुगोपाल ने कोर्ट से ये मुख्य बातें कहीं:-

  • लोग कोर्ट आना चाहते हैं, लेकिन कई बार समय और साधन की कमी से नहीं आ पाते. सीधे प्रसारण से उन्हें मदद मिलेगी.
  • सीधा प्रसारण कोर्ट और गलियारों में होने वाली भीड़ को भी कम करेगा.
  • कोर्ट में अलग से हॉल बनाया जाए जहां वकील, मुवक्किल और इंटर्नशिप कर रहे कानून के छात्र किसी मामले का प्रसारण देख सकें.
  • मीडिया के लोगों के लिए अलग से कक्ष बने.
  • शुरू में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चीफ जस्टिस कोर्ट के संवैधानिक महत्व के मामलों का प्रसारण हो.
  • कोर्ट चाहे तो प्रसारण न होने दे.
  • कोर्ट को अधिकार हो कि किसी मामले की लाइव स्ट्रीमिंग से मना कर दे.
  • कुछ तरह के मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग न हो. ऐसे कुछ मामले हैं- पारिवारिक मामले, यौन उत्पीड़न के मामले, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले या ऐसे मामले जिनसे सामाजिक सद्भाव खराब होने का अंदेशा हो.
  • इस बात के लिए कदम उठाए हैं कि कोई सीधे प्रसारण को रिकॉर्ड कर उसका दुरुपयोग न कर सके. समाचार या कानून की पढ़ाई के लिए शर्तों के साथ इजाज़त दी जा सकती है. लेकिन व्यवसायिक इस्तेमाल पर रोक हो.
  • कोर्ट की गरिमा का ख्याल रखा जाए.
  • कोर्ट में दो कैमरे लगें. एक जजों की तरफ, एक वकील की तरफ. लेकिन वकील के कागज़ात पर कैमरे का फोकस न हो.
  • वकीलों से समय पर बहस पूरी करने को कहा जाए. जिरह बेवजह लंबी न खिंचे.

कुछ वकीलों ने जताया एतराज़

कुछ वकीलों ने कोर्ट को आगाह किया कि अदालती कार्रवाई के सीधे प्रसारण के बुरे नतीजे भी हो सकते हैं. सुनवाई के दौरान जजों की टिप्पणी को बेवजह तूल दिया जा सकता है. राजनीतिक मकसद से जजों की बातों का इस्तेमाल किया जा सकता है. कोर्ट ने इन दलीलों से सहमति जताई, लेकिन कहा कि भारत में खुली अदालत की व्यवस्था है. जब किसी को कोर्ट में आने से नहीं रोका जाता तो प्रसारण देखने से क्यों रोका जाए.

वकील भी अनुशासित रहें

कोर्ट ने वकीलों को आगाह करते हुए कहा कि सीधे प्रसारण से सभी की ज़िम्मेदारी बढ़ जाएगी. वकीलों को समय पर दलील खत्म करनी होगी. एक-दूसरे को बोलने का उचित मौका देना होगा और आवाज़ ऊंची नहीं करनी होगी. माना जा रहा है कि अगले महीने कोर्ट मुकदमों के सीधे प्रसारण को लेकर दिशानिर्देश जारी कर सकता है.

वीडियो देखें-

यह भी पढ़ें-BJP ने बताया राहुल को ‘कॉन्ट्रेक्ट किलर’, पूछा- क्या आपने भारत के खिलाफ 'सुपारी' ली है? लंदन में राहुल ने याद किया 'इंडिया शाइनिंग', कहा- गठबंधन हुआ तो बीजेपी यूपी में 5 सीटें ही जीत पाएगीरेलवे टेंडर घोटाला: लालू, राबड़ी और तेजस्वी के खिलाफ चार्जशीट दायर, जेडीयू ने की इस्तीफे की मांगMovie Review: साफ-सुथरी कॉमेडी के साथ खूब हंसाती है Happy Phirr Bhag Jayegi