पुलिस की तरफ सोशल मीडिया के कथित गलत इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्यों को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Meta और X से भी जवाब मांगा है. याचिका में अलग-अलग राज्यों के ऐसे मामलों का हवाला दिया गया है, जहां पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनके वीडियो सार्वजनिक किए.

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हेमेंद्र पटेल नाम के याचिकाकर्ता ने कहा है कि गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के बावजूद कई जगह पुलिस आरोपियों को रस्सी से बांधकर ले जाती है. पुलिस ऐसी तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर डालती है. इस तरह की हरकत से न सिर्फ आरोपी के सम्मान पर असर पड़ता है, निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार भी प्रभावित होता है. 

स्पष्ट नियम नहीं- याचिकाकर्ता

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याचिका में यह भी कहा गया है कि Meta और X की नीतियों में पुलिस की तरफ से आरोपियों की ऐसी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए जाने से निपटने के लिए स्पष्ट नियम नहीं हैं. यह याचिका पहले भी दाखिल की गई थी. 

इस साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई थी. तब कोर्ट ने कहा था कि उसने जनवरी में राज्यों को ऐसे मामलों के लिए गाइडलाइंस बनाने को कहा है. यह अवधि अप्रैल में पूरी हो रही है. इसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली थी. अब उसने दोबारा याचिका दाखिल करते हुए बताया है कि राज्यों ने इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं की है.

सोशल मीडिया को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती- CJI

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच के सामने याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन पेश हुए. उन्होंने कहा कि कुछ हाई कोर्ट ने इस बारे में गाइडलाइन दी हैं, लेकिन पूरे देश में लागू होने वाले साफ नियम जरूरी हैं. चीफ जस्टिस ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि सोशल मीडिया को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती है.