नेताजी की अस्थियों को जापान से लाने पर सुनवाई करेगा SC, केंद्र को नोटिस जारी
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बोस ने याचिका में कहा है कि सितंबर 1945 से टोक्यो के रेंकोजी मंदिर उनकी अस्थियां रखी हैं. उन्हें भारत लाने के लिए सरकार ने प्रयास नहीं किए हैं.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियों को भारत लाने की मांग पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट सहमत हो गया है. कोर्ट ने नेताजी की बेटी अनीता बोस फाफ की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. याचिका में जापान के रेंकोजी मंदिर में रखी नेताजी की अस्थियों को सम्मानपूर्वक भारत लाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है.
इस साल मार्च में कोर्ट ने इसी मुद्दे को लेकर नेताजी के पौत्र (भांजी के बेटे) आशीष रे की याचिका सुनने से मना किया था. आशीष रे की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंह ने कोर्ट से कहा था कि इस याचिका को नेताजी की बेटी अनिता बोस का भी समर्थन है. लेकिन तब कोर्ट ने कहा था कि अगर उनकी बेटी खुद याचिका दाखिल करेगी, तब इस मांग पर सुनवाई हो सकती है.
क्या है याचिका में दावा?
मंगलवार, 11 अगस्त को अनिता बोस पास की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए. उन्होंने चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच को बताया कि इस याचिका को नेताजी की बेटी ने ही दाखिल किया है. इसके बाद कोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए विदेश मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय को जवाब देने के लिए कहा.
ऑस्ट्रियाई-जर्मन अर्थशास्त्री अनीता बोस फाफ की याचिका में कहा गया है कि नेताजी एक तरह से "मरणोपरांत वनवास" में हैं. सितंबर 1945 से टोक्यो के रेंकोजी मंदिर उनकी अस्थियां रखी हैं. उन्हें भारत लाने के लिए सरकार ने प्रयास नहीं किए हैं. वह नेताजी की एकमात्र जीवित सीधी वंशज हैं. उन्हें अपने पिता के उनके अंतिम संस्कार का अधिकार मिलना चाहिए.
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह मामले में दखल दे. कोर्ट विदेश मंत्रालय से कहे कि वह अस्थियों और कलश को सुरक्षित रखने के लिए जापान सरकार से बातचीत करे. केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह अस्थियों को वापस लाने के लिए मंत्रालयों की एक कमेटी बनाए और इस बारे में एक स्पष्ट कार्य योजना कोर्ट के सामने रखे.























