सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (23 जून, 2026) को कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत ‘उचित मुआवजा’ देने का सिद्धांत ठीक-ठीक गणितीय बराबरी का मामला नहीं है, बल्कि यह उन लोगों को कुछ राहत देने की कोशिश है जिनकी अपूरणीय क्षति हुई है.

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जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (फाइनल) की पढ़ाई कर रहे 20 साल के उस युवक के माता-पिता को दिए गए मुआवजे में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसकी जून 2013 में दिल्ली में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी.

बेंच ने कहा कि इस मामले में मुआवजे के फैसले को सिर्फ गणितीय नजरिए से नहीं देखा जा सकता, बल्कि ऐसे दावों के पीछे मौजूद मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखना जरूरी है. कोर्ट ने कहा कि उसके सामने आया मामला एक ऐसे युवा की जान जाने से जुड़ा है जिसमें पेशेवर तौर पर आगे बढ़ने की अच्छी संभावना थी और इस कानून के तहत मुआवजा तय करने का आधार मुख्य रूप से ‘उचित मुआवजा’ देने का सिद्धांत था.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'यह सिद्धांत पूरी तरह से गणितीय बराबरी का नहीं है, बल्कि यह कानून की ओर से उन लोगों को मानवीय सीमाओं के भीतर कुछ राहत देने की कोशिश है, जिन्हें कभी न पूरा होने वाला नुकसान हुआ है.' सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के अगस्त 2022 के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया.

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हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के उस आदेश को सही ठहराया था, जिसमें पीड़ित के माता-पिता को 81.21 लाख रुपये का मुआवजा देने का फैसला सुनाया गया था. माता-पिता ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत दावा याचिका दायर करके अपने बेटे की असमय मौत के लिए मुआवजे की मांग की थी.

मुआवजे की रकम के मामले पर विचार करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायाधिकरण ने मृतक की शिक्षा में प्रगति, पेशेवर संभावनाओं और करियर में संभावित तरक्की को ध्यान में रखते हुए उसकी मासिक आय 55,500 रुपये तय की थी.

बेंच ने कहा, 'इस मामले के तथ्यों को देखते हुए, मृतक अविवाहित बेटे के माता-पिता (दावा करने वाले)‘फिलियल कंसोर्टियम’ (माता-पिता को हुए गहरे भावनात्मक सदमे, प्यार, स्नेह और उनके साथ के नुकसान की भरपाई के लिए दिया जाने वाला मुआवाजा) के तहत मुआवजे के हकदार हैं.'

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि पहले से दिए गए मुआवज़े के अलावा, दावा करने वाले ‘फिलियल कंसोर्टियम’ के लिए प्रति व्यक्ति 40,000 रुपये पाने के हकदार होंगे. बेंच ने कहा कि न्यायाधिकरण के फैसले के अनुसार, दावा करने वालों को मिलने वाला कुल मुआवजा 81,21,900 रुपये से बढ़कर 82,01,900 रुपये हो जाएगा, साथ ही उस पर ब्याज भी मिलेगा.

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