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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) पर 2 लाख रुपए का आर्थिक दंड लगाया है. राज्य निर्वाचन आयोग हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. हाई कोर्ट ने एक से अधिक जगह मतदाता सूची में शामिल लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस रोक को सही कहा. व्यर्थ की याचिका दाखिल करने के लिए आयोग पर हर्जाना लगाया.

उत्तराखंड चुनाव आयोग ने 6 जुलाई 2025 को एक स्पष्टीकरण सर्क्युलर जारी किया था. इसमें कहा गया था कि अगर किसी उम्मीदवार का नाम एक से अधिक ग्राम पंचायत या नगर निकाय की मतदाता सूची में है, तो उसे नामांकन से वंचित नहीं किया जाएगा. 11 जुलाई को हाई कोर्ट ने इस स्पष्टीकरण पर रोक लगा दी थी.

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हाई कोर्ट ने कहा था कि राज्य चुनाव आयोग की तरफ से जारी स्पष्टीकरण प्रथमदृष्टया उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 की धारा 9(6) और 9(7) के विरुद्ध लगता है इसलिए, इस स्पष्टीकरण पर अमल न किया जाए. हाई कोर्ट ने साफ किया था कि उसने पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई है. रोक सिर्फ उस सर्क्युलर पर है जो कानून के खिलाफ था.

राज्य निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि चुनाव प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है. इसलिए, हाई कोर्ट के आदेश में संशोधन किया जाए. लेकिन इस दलील ने जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच को नाराज़ कर दिया. बेंच ने कहा, 'आप कैसे किसी कानूनी प्रावधान के विपरीत निर्णय ले सकते हैं?'