नई दिल्ली: साल 2001 में गाज़ियाबाद के पिलखुआ में सीमा गर्ग और उनकी दो बच्चियों की हत्या हुई. पुलिस ने बिना ठोस सबूत के सीमा के पति नितिन को आरोपी बनाया लेकिन नितिन की भी हत्या हो गई. पुलिस की जांच में कोई नतीजा नहीं निकला. सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में मामला सीबीआई को सौंपा लेकिन उसकी जांच भी किसी अंजाम तक नहीं पहुंची. 2014 में ये जांच भी बंद हो गई.
अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है. जस्टिस जे चेलमेश्वर और एस अब्दुल नज़ीर ने कहा है कि इस जघन्य वारदात को अंजाम देने वाले अब तक कानून के शिकंजे से बाहर हैं. इसलिए ये ज़रूरी है कि उनकी पहचान कर उन्हें सज़ा दी जाए.
तीन लोगों की इस एसआईटी का नेतृत्व सीबीआई के पूर्व विशेष निदेशक एम एल शर्मा को सौंपा गया है. कोर्ट ने कहा है शर्मा अपनी पसंद के दो योग्य पूर्व अधिकारियों को टीम का हिस्सा बनाएं. एसआईटी तीन महीने में सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी.
नितिन गर्ग की मां सुनीता देवी और भाई अजय गर्ग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इंसाफ की गुहार की थी. उनका कहना था कि पहले पुलिस और बाद में सीबीआई ने जांच में ढिलाई बरती. उनकी तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि इस बात के सबूत हैं कि सीबीआई के जांच अधिकारी हत्या के लिए संदिग्ध लोगों से मिल गए थे. कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग को सही मानते हुए जांच एसआईटी को सौंप दी.