लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में नहीं पेश हुए गवाह, SC नाराज, UP पुलिस से पूछा- दो महीने से आप कर क्या रहे हो?
पीड़ितों का पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने स्थिति रिपोर्ट का हवाला देते हुए पुलिस पर आरोप लगाया कि तारीख से पहले गवाहों को डराया-धमकाया जा रहा है इसलिए वे नहीं आ रहे हैं.

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा और अन्य के खिलाफ चल रहे मुकदमे में गवाहों को पेश न करने और जांच की धीमी गति पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है. शुक्रवार (8 मई, 2026) को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस से पूछा कि 2 महीनों से गवाहों से पूछताछ क्यों नहीं की गई है.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने जो स्थिति रिपोर्ट सौंपी है उसमें गवाहों को पेश न करने का कोई कारण नहीं बताया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि लगभग दो महीने से इस मामले में किसी भी गवाह से पूछताछ नहीं की गई है. आशीष मिश्रा के वकील सिद्धार्त दवे ने कोर्ट को बताया कि पहले ट्रायल में 44 गवाहों से पूछताछ हुई, जबकि 15 को बरी कर दिया गया था, 72 और गवाहों से पूछताछ की जानी थी. दूसरे ट्रायल में 35 गवाहों में से 26 पहले ही गवाही दे चुके थे और नौ बाकी थे.
उन्होंने कहा कि दो महीने में किसी गवाह से पूछताछ नहीं हो पाई है, जबकि जमानती वॉरंट जारी किए गए, यहां तक की उनके खिलाफ गैर जमानती वॉरंट भी जारी हुए. कोर्ट ने इस पर अभियोजन पक्ष यूपी पुलिस से पूछा, 'आप मार्च से अब तक क्या कर रहे थे?'
पीड़ितों का पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने स्थिति रिपोर्ट का हवाला देते हुए पुलिस पर आरोप लगाया कि तारीख से पहले गवाहों को डराया-धमकाया जा रहा है इसलिए वे नहीं आ रहे हैं. कोर्ट ने उसके सामने पेश की गई स्थिति रिपोर्ट पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इसमें पिछली तारीखों को गवाहों के पेश न होने का कोई कारण नहीं बताया गया है.
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बेंच ने कहा, 'हम पीठासीन न्यायाधीश को गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कानूनसम्मत कदम उठाने का निर्देश देते हैं.' कोर्ट ने निचली अदालत के न्यायाधीश से मुकदमे को समयबद्ध तरीके से समाप्त करने का प्रयास करने और अदालत के समक्ष स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा.
सुप्रीम कोर्ट लखीमपुर खीरी हिंसा मामले से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था. घटना से जुड़े दो मामलों की सुनवाई उत्तर प्रदेश की एक अदालत में चल रही है. लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में तीन अक्टूबर, 2021 को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के विरोध में किसानों के प्रदर्शन के दौरान चार किसानों सहित आठ लोग मारे गए थे.
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चार किसानों को एक स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) ने कुचल दिया था. इसके बाद कथित तौर पर क्रोधित किसानों ने एक चालक और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दो कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी.
एक मामले में निचली अदालत ने दिसंबर 2023 में आशीष मिश्रा और 12 अन्य लोगों के खिलाफ किसानों की मौत के मामले में कथित हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य दंडात्मक धाराओं के तहत आरोप तय किए, जिससे मुकदमे का रास्ता साफ हो गया.

























