खजुराहो के जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति को दोबारा पूरी तरह स्थापित करने की मांग सुनने से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया है. याचिकाकर्ता का कहना था कि 7 फीट ऊंची इस मूर्ति को मुगल काल मे खंडित किया गया था. इसे दोबारा स्थापित किया जाना चाहिए, लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह विषय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) के अधिकार क्षेत्र का है. इसमें अदालत कोई आदेश नहीं दे सकती है.
राकेश दलाल नाम के याचिकाकर्ता का कहना है कि जावरी मंदिर की मूर्ति मुगल आक्रमण के दौरान खंडित हुई थी. आजादी के 77 साल बाद भी इसे पुनर्स्थापित नहीं किया गया है. सरकार की इस निष्क्रियता से श्रद्धालुओं के पूजा-अधिकार का हनन हो रहा है.
सालों तक चलाए गए जन अभियान, पर नहीं हुई कोई सुनवाई
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील संजय नूली भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच के सामने पेश हुए. उन्होंने जजों को बताया कि इस मुद्दे पर सालों से विरोध, ज्ञापन और जन-अभियान चलाए गए, लेकिन किसी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई. इसलिए, वह कोर्ट से मामले में दखल का अनुरोध कर रहे हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुनने से मना कर दिया.
कोर्ट ने कहा कि यह मामला एक संरक्षित स्मारक से जुड़ा है. वहां किसी भी बदलाव के लिए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की अनुमति जरूरी है. किसी तरह का बदलाव ASI ही कर सकता है. इसलिए, याचिकाकर्ता ASI से संपर्क करें.
सीजेआई ने याचिकाकर्ता से क्या कहा?
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बी. आर. गवई ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, ‘अब आप भगवान से ही प्रार्थना कीजिए. आप कहते हैं कि आप भगवान विष्णु के परम भक्त हैं. वही आपकी सहायता कर सकते हैं. हमें क्षमा कीजिए. यह एक पुरातात्त्विक स्थल है. ASI के कामकाज में हम दखल नहीं देंगे.’