Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice Of India) के रूप में न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ (Justice DY Chandrachud) की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका को खारिज दिया. याचिका को खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि याचिका गलत आधार पर दायर की गई है.
सीजेआई यूयू ललित की अगुवाई वाली पीठ ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उनके कुछ जजमेंट और कथित हितों के टकराव (Conflict of Interest) का हवाला दिया था. चंद्रचूड़ 9 नवंबर को भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे.
सीजेआई यूयू ललित ने की थी सिफारिशमौजूदा सीजेआई यूयू ललित ने 11 अक्टूबर को केंद्र सरकार को अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस चंद्रचूड़ के नाम की सिफारिश की थी. जस्टिस चंद्रचूड़ 10 नवंबर 2024 तक देश के सीजेआई रहेंगे. वह देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश वाईवी चंद्रचूड़ के बेटे हैं जो 1978 से लेकर 1985 तक देश के मुख्य न्यायाधीश थे. जस्टिस चंद्रचूड़ को 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था.
कई जरूरी मुद्दों पर दे चुके हैं फैसलान्यायमूर्ति चंद्रचूड़ एससी के जज रहते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों में अपना निर्णय दे चुके हैं. उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर, सबरीमाला और धारा 377 को गैर-अपराधी बनाने सहित कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले ले चुके हैं. उनका हालिया ऐतिहासिक फैसला अविवाहित महिलाओं को प्रेग्नेंसी टर्मिनेशन की इजाजत देना है.
जस्टिस चंद्रचूड़ (Justice DY Chandrachud) 29 मार्च 2000 से 31 अक्टूबर, 2013 तक इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) के चीफ जस्टिस अप्वाइंट होने के पहले तक बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में जज थे. इससे पहले जून 1998 में बॉम्बे हाईकोर्ट में उनको सीनियर एडवोकेट बनाया गया था और उसी साल वह बॉम्बे हाईकोर्ट में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बन गये थे.
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