सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (19 फरवरी, 2025) को एक मामले की सुनवाई स्थगित करने के अनुरोध पर आपत्ति जताई है. सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध करते हुए यह दलील दी गई थी कि इस मामले में सीनियर एडवोकेट बहस करेंगे. कोर्ट ने वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि इस गलतफहमी में न रहें कि सीनियर एडवोकेट का नाम लेने से मामला स्थगित कर दिया जाएगा.

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने उस वकील को फटकार लगाई, जिसने एक वाणिज्यिक विवाद से संबंधित मामले को स्थगित करने का अनुरोध किया था. वकील ने कोर्ट से मामले को चार सप्ताह के लिए स्थगित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे इस मामले पर बहस करेंगे.

वकील ने कहा कि हरीश साल्वे विदेश में हैं और लौटने के बाद वह मामले में स्वयं बहस करेंगे. बेंच ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा, 'क्या आपको लगता है कि अगर आप किसी वरिष्ठ वकील का नाम लेंगे तो हम मामले को स्थगित कर देंगे? वकीलों की यह प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए. हम सिर्फ इसलिए मामले को स्थगित नहीं करेंगे क्योंकि आपने किसी वरिष्ठ वकील का नाम लिया है.'

जब मामला बाद में सुनवाई के लिए आया तो कोर्ट ने कहा कि वह इस धारणा को दूर करना चाहती है कि वह वरिष्ठ वकील का नाम लेने पर मामले को स्थगित कर सकती है. बहरहाल, कोर्ट ने अनुरोध स्वीकार कर लिया और सुनवाई स्थगित कर दी.

सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में एक वकील को कार में बैठकर अदालत को संबोधित करने के लिए फटकार लगाई थी और कानूनी कार्यवाही की गरिमा बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया था.

 

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