धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोनम वांगचुक का पहला रिएक्शन आया है. अपने X अकाउंट पर उन्होंने इस जीत का पूरा श्रेय देश के युवाओं और आम नागरिकों के अदम्य साहस को दिया है. उन्होंने अपने बयान में कहा, "यह लोकतंत्र की जीत है... सीधी सड़क से आया हुआ सीधा लोकतंत्र. यह शांति, धैर्य और दृढ़ संकल्प की जीत है." यह बयान उन लाखों युवाओं के लिए एक बड़ा समर्थन है, जिन्होंने व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोला था.

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देशभर में चले लंबे संघर्ष और सड़कों पर उतरे युवाओं के सैलाब ने आखिरकार अपना असर दिखा दिया है. सत्ता को झुकना पड़ा है और इसे सीधे तौर पर जनता की ताकत के रूप में देखा जा रहा है. 

नागरिकों के निडर रवैये को सलाम करते हुए वांगचुक ने आगे कहा, 'CJP और देश की 'जेन ज़ी' (Gen Z) को बधाई. देश के हर कोने से उठ खड़े होने और 'डर के डर' को पीछे छोड़ने के लिए सभी नागरिकों का धन्यवाद.'

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हालांकि, वांगचुक ने साफ कर दिया है कि यह संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है. उन्होंने अपने संदेश के आखिर में स्पष्ट एजेंडा तय करते हुए लिखा, 'अब जवाबदेही से, सुधारों की ओर (From accountability, now to reforms).'

26 दिन के अनशन के बाद मिला था सरकार का भरोसा

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना 26 दिनों का लंबा अनशन शुक्रवार को ही समाप्त किया था. गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने उन्हें कप से जूस पिलाकर उनका उपवास तुड़वाया और उन्हें सरकार की तरफ से भरोसा दिलाया गया था. 

सरकार की ओर से यह ठोस आश्वासन दिया गया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसी भी आंदोलनकारी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी. इसी भरोसे के बाद वांगचुक ने अनशन खत्म करने का यह फैसला लिया.