लद्दाख के अधिकारों और मांगों को लेकर केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद भी असहमति बनी हुई है. कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा है कि लद्दाख के नेता गृह मंत्रालय (MHA) के साथ हुई बैठक के नतीजों से संतुष्ट नहीं हैं. उनके मुताबिक, लद्दाख के प्रतिनिधियों ने जो मसौदा सौंपा था और गृह मंत्रालय की ओर से जो प्रस्ताव दिया गया, उनमें काफी अंतर है.
सोनम वांगचुक के अनुसार, बैठक में सामने आए प्रस्ताव और लद्दाख के प्रतिनिधियों की मांगों के बीच अंतर को लेकर चिंता है. उन्होंने कहा कि यहां अंतर 19-20 का नहीं है, बल्कि जमीन-आसमान का है. अब नेता गृह मंत्रालय की ओर से संशोधित मसौदा मिलने का इंतजार कर रहे हैं.
लद्दाख की मांगों पर बातचीत जारी
लद्दाख के प्रतिनिधि लंबे समय से क्षेत्र के अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं. ऐसे में गृह मंत्रालय की ओर से आने वाला अगला ड्राफ्ट अहम माना जा रहा है. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद कम करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.
सोनम वांगचुक की केंद्र सरकार से मुख्य मांगें
लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के बजाय पूर्ण राज्य बनाने की मांग है, ताकि स्थानीय लोगों की चुनी हुई सरकार को अपने क्षेत्र से जुड़े फैसले लेने का ज्यादा अधिकार मिले. इससे आदिवासी बहुल लद्दाख में जमीन, स्थानीय संसाधनों और परंपराओं की रक्षा के लिए अधिक संवैधानिक अधिकार मिल सकते हैं. स्थानीय समुदाय चाहते हैं कि उनके भविष्य से जुड़े फैसलों में उनकी भागीदारी हो.सरकारी नौकरियों में स्थानीय युवाओं को पर्याप्त अवसर और आरक्षण मिले. जून 2025 में केंद्र ने लद्दाख के लिए नौकरी और स्थानीय पहचान से जुड़े कुछ नियम अधिसूचित किए थे, लेकिन आंदोलनकारी इसे अपनी सभी मांगों का समाधान नहीं मानते.
