वोटर लिस्ट में नाम हटने-जुड़ने की होगी समीक्षा, 2026 तक आएगी रिपोर्ट
SIR को लेकर LAFC ने पूर्व जजों का पांच सदस्यीय पैनल बनाया है. मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाला पैनल SIR की प्रक्रिया, कानूनी पहलुओं और पात्र मतदाताओं पर असर की जांच करेगा.

SIR को लेकर एक नया कदम सामने आया है. लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन (LAFC) ने पांच पूर्व जजों का एक स्वतंत्र पैनल बनाया है. इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन बी. लोकुर करेंगे. पैनल SIR की कानूनी प्रक्रिया, उसके तरीके और पात्र मतदाताओं पर इसके असर की जांच करेगा.
LAFC के मुताबिक, पैनल में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस ए.के. पटनायक, जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बदर दुरेज अहमद और पूर्व जज रेखा शर्मा व अंजना प्रकाश शामिल हैं. पैनल को अपनी जांच स्वतंत्र रूप से करने की जिम्मेदारी दी गई है. पैनल यह भी देखेगा कि SIR के दौरान योग्य नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में बने रहे या नहीं और क्या अयोग्य नामों को नियमों के तहत हटाया गया. इसके अलावा SIR की पूरी प्रक्रिया और उसके असर की भी समीक्षा की जाएगी.
देशभर में होंगी जनसुनवाई
LAFC के अनुसार, पैनल देश के अलग-अलग हिस्सों में जनसुनवाई करेगा. इसके लिए पूर्ण और क्षेत्रीय बेंच अलग-अलग जगहों पर जा सकती हैं. इन सुनवाई में प्रभावित मतदाताओं, नागरिक संगठनों और विशेषज्ञों की बात सुनी जाएगी. पैनल इन लोगों के बयान और दूसरे उपलब्ध तथ्यों को अपनी जांच का हिस्सा बनाएगा. उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पैनल दिसंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट तैयार करने का लक्ष्य रखता है.
वरिष्ठ वकील देंगे कानूनी सलाह
LAFC ने बताया कि कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, चंदर उदय सिंह, प्रशांतो चंद्र सेन, राजू रामचंद्रन, रेबेका मैमन जॉन, वारिशा फरासत और वृंदा ग्रोवर समेत कई वरिष्ठ वकील पैनल को कानूनी सलाह देंगे. हालांकि, यह पैनल LAFC की ओर से बनाया गया स्वतंत्र नागरिक पहल है और इसके निष्कर्ष अपने आप चुनाव आयोग या अदालतों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होंगे.
SIR के बाद छूटे मतदाताओं के लिए आयोग का अलग अभियान
इस बीच, चुनाव आयोग ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है, जहां SIR पूरा हो चुका है. इसका मकसद उन योग्य मतदाताओं की पहचान करना है, जिनके नाम पहले की वोटर लिस्ट में थे लेकिन बाद की सूची में नहीं हैं. साथ ही नए और पहली बार वोट देने वाले योग्य लोगों को भी नाम जुड़वाने में मदद दी जाएगी. इस प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO पहले की वोटर लिस्ट और SIR के बाद की मौजूदा सूची की तुलना करेंगे. अगर किसी व्यक्ति का नाम पहले था लेकिन अब नहीं है, तो BLO उसके घर जाकर स्थिति की जांच करेगा. योग्य पाए जाने पर Form 6 के जरिए नाम दोबारा जुड़वाने की प्रक्रिया में मदद की जाएगी.
एक महीने में पूरा करने का लक्ष्य
चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार, इस अभियान को करीब एक महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. एक BLO से हर सप्ताह करीब 20 से 25 मतदाताओं को कवर करने की उम्मीद है. मौके पर योग्य पहली बार वोट देने वालों और SIR में छूट गए वास्तविक मतदाताओं से Form 6 भी लिया जा सकता है.
Form 6 को लेकर क्या बदला?
26 सितंबर को चुनाव आयोग ने Form 6 से जुड़े नियम को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया था. जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां नए मतदाता अब सामान्य वैधानिक Form 6 के जरिए नाम जुड़वाएंगे. SIR के दौरान इस्तेमाल की गई अतिरिक्त घोषणा उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू रहेगी, जहां SIR अभी चल रहा है. SIR के दौरान इस अतिरिक्त घोषणा में नए आवेदकों से खुद, अपने माता-पिता या दादा-दादी को पहले की मतदाता सूची से जोड़ने वाली जानकारी मांगी जाती है. वहीं SIR पूरा होने के बाद नए आवेदकों के लिए सामान्य Form 6 प्रक्रिया लागू होगी.
SIR पर अब दो स्तर पर प्रक्रिया
इस तरह SIR को लेकर फिलहाल दो अलग प्रक्रियाएं चल रही हैं. एक तरफ LAFC की ओर से बनाया गया पूर्व जजों का पैनल SIR की कानूनी प्रक्रिया, तरीके और पात्र मतदाताओं पर असर की समीक्षा करेगा. दूसरी तरफ चुनाव आयोग SIR पूरा हो चुके राज्यों में छूटे हुए योग्य मतदाताओं और नए मतदाताओं को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए विशेष अभियान चला रहा है.





















