SIR से संबंधित विवाद को लेकर CJP ने मुंबई में प्रोटेस्ट किया था. इस पर कई लोगों ने फाउंडर अभिजीत दीपके की आलोचना की थी. इस पर  आशुतोष रांका ने एक्स पर ट्वीट कर लिखा कि अभिजीत दीपके की आलोचना करने के लिए एक पूरा खुद को लिबरल कहने वाला इकोसिस्टम सक्रिय हो गया है.यह आलोचना इसलिए हो रही है क्योंकि वे बहुत लंबे समय बाद लाखों भारतीयों का ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाब रहे हैं. मजेदार बात यह है कि यह इकोसिस्टम सिर्फ ट्विटर पर ही मौजूद है, लेकिन फिर भी उन्हें लगता है कि वे ही लोकतंत्र के एकमात्र रक्षक हैं.

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आशुतोष के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक्स पर लिखा कि यह एक बहुत बड़ी समस्या है. एक खास वर्ग, जिसमें सिर्फ़ बीजेपी ही नहीं, बल्कि दूसरी पार्टी भी यह सोचता है कि भारत को बचाना और संविधान को बचाना सिर्फ उन्हीं का काम है. वे खुद को लिबरल और संविधान का ठेकेदार मानते हैं.

SIR को लेकर CJP का विरोध जारी

CJP पिछले कुछ समय से SIR को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है. संगठन ने SIR प्रक्रिया को रोकने, जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत कई मांगें रखी हैं. 2 अक्टूबर को मुंबई में CJP के प्रदर्शन को लेकर भी संगठन और पुलिस के बीच अनुमति का मुद्दा सामने आया था. बाद में प्रदर्शन और आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात CJP की ओर से कही गई.