बांग्लादेश की एक अदालत अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और 285 अन्य के खिलाफ देशद्रोह के मामले में आरोप तय करने पर शुक्रवार (18 अप्रैल 2026) को दलीलें सुनेगी. इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने उनकी बांग्लादेश वापसी को लेकर बयान दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'बांग्लादेश की सरकार की तरफ में एक अनुरोध मिला है, जिस पर विचार किया रहा है. ये उनकी (शेख हसीना) न्यायिक और आंतरिक कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है. भारत इस मुद्दे पर बातचीत जारी रखेगा.'

शेख हसीना को लेकर क्या बोला भारत?

रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हम सभी घटनाक्रमों पर बहुत बारीकी से नजर रख रहे हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश की नई सरकार के साथ संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया. दोनों देश द्विपक्षीय बातचीत के जरिए आपसी साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमत हुए. भारत और बांग्लादेश के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर जल्द ही आधिकारिक बैठकें होने की उम्मीद है.'

शेख हसीना पर देशद्रोह का मामला

बांग्लादेश में शेख हसीना पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल का मामला दर्ज है. आरोप है कि उन्होंने 19 दिसंबर, 2024 को ऑनलाइन की गई ‘जॉय बांग्ला ब्रिगेड’ बैठक में भाग लेकर मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली तत्कालीन अंतरिम सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश रची थी. बैठक में दुनिया भर से 577 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें कथित तौर पर विद्रोह भड़काने और हसीना को प्रधानमंत्री के रूप में बहाल करने की प्रतिज्ञा शामिल थी. 

जॉय बंगला ब्रिगेड, हसीना की अवामी लीग पार्टी और उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान की विरासत की मजबूत समर्थक है. हसीना समेत 286 आरोपियों में से 259 अब तक अदालत में पेश नहीं हुए हैं और उनकी अनुपस्थिति में ही उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा रहा है. अदालत ने इससे पहले, पिछले वर्ष अक्टूबर में सार्वजनिक नोटिस जारी कर आरोपियों को पेश होने को कहा था.

पिछले साल आरोपपत्र दाखिल किया गया

यह मामला पिछले साल मार्च में सीआईडी के सहायक पुलिस अधीक्षक एमडी एनामुल हक ने गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद दर्ज किया था. अगस्त में 286 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया, जिसके बाद अदालत ने सभी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए. देशभर में छात्रों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के पश्चात पांच अगस्त, 2024 को देश छोड़ देने के बाद से हसीना भारत में रह रही हैं.

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