कांग्रेस सांसद शशि थरूर के लिए एक अच्छी खबर सामने आ रही है. सरकार संसद की स्थायी समितियों का कार्यकाल एक साल से बढ़ाकर दो साल करने पर विचार कर रही है. अगर यह फैसला लागू होता है तो थरूर दो साल और विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष बने रह सकते हैं.

क्यों बढ़ाया जा सकता है कार्यकाल?

अभी स्थायी समितियों का कार्यकाल हर साल खत्म हो जाता है और हर बार पुनर्गठन होता है. नए सदस्य जुड़ने से समितियों के कामकाज की निरंतरता टूट जाती है. इसी वजह से विपक्ष लंबे समय से कार्यकाल बढ़ाने की मांग कर रहा था. उनका कहना है कि इससे विधेयकों, रिपोर्टों और नीतियों की गहराई से समीक्षा संभव हो पाएगी. अब सरकार इस सुझाव को गंभीरता से ले रही है और संभावना है कि इस बार समितियों का कार्यकाल दो साल का कर दिया जाए.

थरूर को कैसे होगा फायदा?

शशि थरूर को पिछले साल 26 सितंबर को विदेश मामलों की स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाया गया था. लेकिन पार्टी के अंदर उनके रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे हैं. अगर कार्यकाल बढ़ा तो वे बिना किसी बदलाव के दो साल और इस पद पर रह पाएंगे. यह कदम उनके लिए राजनीतिक रूप से बड़ा सहारा साबित हो सकता है और उन्हें पार्टी के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका मिलेगा.

संसद में कितनी समितियां हैं?

फिलहाल संसद में 24 स्थायी समितियां हैं. हर समिति में 31 सदस्य होते हैं, जिनमें से 21 लोकसभा से और 10 राज्यसभा से होते हैं. ये समितियां संबंधित मंत्रालयों और विभागों के बजट, नीतियों और कामकाज पर नजर रखती हैं. इनके अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति द्वारा नामित किए जाते हैं. समितियों का कार्य सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि ये विधेयकों पर भी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करती हैं जो संसद के फैसलों को प्रभावित करती है.

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