कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने दिल्ली में हुए Gen Z आंदोलन और भारत के लोकतंत्र को बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत में NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन पर सरकार का रुख यह दिखाता है कि भारतीय लोकतंत्र में आज भी लचीलापन और जनता की बात सुनने की क्षमता बाकी है. जंतर-मंतर पर हुए इस आंदोलन के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. सरकार के इस कदम का सपोर्ट करते हुए उन्होंने कहा, 'सिस्टम झुका तो सही, लेकिन टूटा नहीं.'

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साउथ एशिया के बाकी देशों से तुलना करते हुए थरूर ने कहा, 'बांग्लादेश और श्रीलंका में सरकारों ने जनता की आवाज दबाने की कोशिश की, जिससे वहां के सरकारों को मजबूरन सत्ता छोड़कर भागना पड़ा. नेपाल में सरकार जरूर बदली, लेकिन राजनीतिक ढांचा बचा रहा. वहीं पाकिस्तान में सेना के इशारे पर चलने वाली सरकार आ गई और म्यांमार में सेना ने पूरी तरह से तख्तापलट कर दिया. पड़ोसी देशों की तुलना में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था कहीं बेहतर साबित हुई, क्योंकि इसने अपने युवाओं के गुस्से को समझा और सही समय पर कदम उठाकर स्थिति को संभाल लिया.

एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, 'किसी ने इस्तीफा दिया है. लोकतंत्र को इतना सतर्क और लचीला होना चाहिए कि वह जनता की भावना को पहचाने और फैसला ले. यह बात भारतीय व्यवस्था की एक बड़ी ताकत को दर्शाती है.' कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस महीने की शुरुआत में सीजेपी के नेतृत्व वाले Gen Z आंदोलन को लेकर कहा था कि इसी तरह के मुद्दे कांग्रेस के छात्र संपर्क अभियान 'छात्रों की गूंज' का हिस्सा थे, जो उतना प्रभावी नहीं रहा.

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उन्होंने कहा था, 'जिन मुद्दों को कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर उठाया, वे मुद्दे कांग्रेस पहले ही उठा चुकी थी. राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए पेपर लीक का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था. हमें खुद से यह सवाल पूछना होगा कि हमसे कहां चूक हुई? क्या हम युवाओं की बात ठीक से सुनने में असफल रहे या फिर हम Gen Z की नब्ज और उनकी सोच को पकड़ नहीं पाए?'