Tharoor Hits Back: कांग्रेस सांसद शशि थरूर और उनकी ही पार्टी के बीच शुरू हुआ नया विवाद अब खुलकर सामने आ गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जी-7 शिखर सम्मेलन में कथित तौर पर उठाए गए एक मुद्दे का जिक्र करने पर कांग्रेस नेतृत्व ने थरूर को निशाने पर लिया, तो थरूर ने सोशल मीडिया पर लंबा जवाब देकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है.

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विवाद की शुरुआत उस बयान से हुई जिसमें थरूर ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध और संघर्ष के दौरान कॉमर्शियल जहाजों पर काम करने वाले नागरिक नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा मजबूती से उठाया. कांग्रेस ने इसे मोदी के प्रति "अत्यधिक प्रशंसा" के रूप में देखा और सवाल उठाए.

कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि शशि थरूर की प्रधानमंत्री मोदी के प्रति प्रशंसा अब वास्तविक दुनिया से भी आगे निकल गई है और वह अब वे बातें भी सुनने लगे हैं जो प्रधानमंत्री ने कही ही नहीं.

इस आलोचना के बाद थरूर ने एक्स पर विस्तृत प्रतिक्रिया दी. उन्होंने साफ किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री के शब्दों को गढ़ा नहीं, बल्कि उन रिपोर्टों का संदर्भ दिया था जो व्यापक रूप से प्रकाशित हो चुकी थीं.

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थरूर ने लिखा, "जो लोग मानते हैं कि मैंने वे शब्द 'सुने' जो नरेंद्र मोदी ने जी-7 में कभी कहे ही नहीं, मैं केवल उन व्यापक रूप से प्रकाशित रिपोर्टों का उल्लेख कर रहा था जिनमें उनकी टिप्पणियों का जिक्र था. मैं व्यापक रूप से पढ़ता हूं और जो पढ़ता हूं उसे याद रखता हूं. अपने पूरे जीवन में मुझ पर कभी भी तथ्यों या बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप नहीं लगा और मैं उन रिपोर्टों के अपने सारांश पर कायम हूं."

अपने पोस्ट में थरूर ने एक वीडियो लिंक और एआई प्लेटफॉर्म गूगल जेमिनी द्वारा तैयार सारांश का भी हवाला दिया. इसके अनुसार जी-7 आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नागरिक नाविकों की रक्षा का मुद्दा उठाया था.

थरूर ने विशेष रूप से उस घटना का उल्लेख किया जिसमें ओमान की खाड़ी में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई थी. उन्होंने कहा कि उनका बयान केवल भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सिद्धांतों की रक्षा से जुड़ा था, न कि किसी राजनीतिक दल के समर्थन से.

उन्होंने लिखा, "मुझे यह असाधारण लगता है कि भारतीय नागरिक नाविकों की सुरक्षा से जुड़े एक बयान को पक्षपातपूर्ण राजनीतिक विवाद में बदल दिया गया. तीन भारतीयों ने अपनी जान गंवाई. मेरी टिप्पणी हमारे नागरिकों की सुरक्षा और इस सिद्धांत के बारे में थी कि नागरिक नाविक कभी भी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य नहीं होने चाहिए."

थरूर यहीं नहीं रुके. उन्होंने आगे कहा, "अगर कुछ लोग इस चिंता का समाधान करने के बजाय राजनीतिक अंक बटोरने में अधिक रुचि रखते हैं, तो यह मेरे बारे में नहीं बल्कि उनके बारे में अधिक बताता है."

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