इंटरनेट पर मौजूद पोर्न सामग्री पर अंकुश लगाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया है. चीफ जस्टिस ने कहा है कि यह निश्चित रूप से महत्वपूर्ण विषय है. यह ऐसा मामला नहीं है, जिसपर कोर्ट में सुनवाई की जा सके. यह एक नीतिगत विषय है. हमें उम्मीद है कि सरकार इसे लेकर जरूरी कदम उठाएगी. 

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सुप्रीम कोर्ट की सीजेआई बेंच ने की याचिका पर सुनवाईइस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की सीजेआई वाली बेंच कर रही थी. इसकी अध्यक्षता खुद सीजेआई सूर्यकांत ने की. उन्होंने कहा, 'मुद्दा निश्चित रूप से बहुत महत्वपूर्ण हैं. हालांकि, यह देखते हुए कि इस मामले में कानून से जुड़ा ऐसा कोई सवाल नहीं है, जिसपर कोर्ट को विचार करने की जरूरत हो. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सरकारी अधिकारियों के पास अपनी बात रखने की छूट देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया. कोर्ट ने कहा, 'ऐसे मामले एक्सपर्ट्स और खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.

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सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता ने कानूनी व्यवस्था बनाने की मांग की थी

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन पोर्न पर कंट्रोल करने के लिए एक नेशनल पॉलिसी बनाने की मांग की थी. याचिकाकर्ता ने ऐसा सिस्टम बनाने की मांग की थी, जिससे 18 साल से कम उम्र के लोग अश्लील सामग्री न देख सकें. 

बीएल जैन ने लगाई यह याचिकायह याचिका पीआईएल बीएल जैन ने दायर की थी. इनकी ओर से वकील वरुण ठाकुर पेश हुए. याचिका में केंद्र सरकार की तरफ से नेशनल पॉलिसी बनाने की मांग की गई थी. इससे पोर्नोग्राफिक सामग्री (खासकर नाबलिगों को लेकर) देखने पर देशव्यापी बैन लगाया जा सके. याचिकाकर्ता के मुताबिक, इंटरनेट पर व्यापक प्रसार ने प्रोनोग्राफिक सामग्री को आसानी से उपलब्ध करा दिया है. इससे अत्यधिक उपभोग और इसकी लत लग गई है.  याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसी सामग्री के बढ़ते उपभोग की वजह से यौन अपराधों को बढ़ावा दिया गया है. 

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