नई दिल्लीः आज सावन शिवरात्रि का व्रत है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन का विशेष महत्व होता है. मान्‍यता है कि फाल्‍गुन महीने में पड़ने वाली महाशिवरात्रि की तरह ही सावन शिवरात्रि भी महत्वपूर्ण होता है. हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार शिव पूजन के लिए सावन का महीना सर्वश्रेष्‍ठ माना जाता है. सावन के महीने में स्वयं भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी और अपने दूतों के साथ पूरे महीने पृथ्वी पर आ जाते हैं.

शिव भक्‍तों के लिए सावन शिवरात्रि का बहुत महत्‍व माना जाता है. सावन का महीना शुरू होते ही शिव भक्‍त बोल बम के नारों के साथ कांवड़ यात्रा करने हरिद्वार और गौमुख की ओर निकल पड़ते हैं. भक्त सावन शिवरात्रि के दिन अपने आराध्‍य भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं.

सावन शिवरात्रि के दिन जलाभिषेक करना कल्‍याणकारी माना जाता है. इस दिन महिलाएं हरे वस्त्र में शिवमंदिर पहुंचती है और शिव की आराधना करती है. सुबह से ही शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है.

 भक्त शिवरात्रि के मौके पर शिव चालीसा, शिव पुराण, रुद्राष्टक का पाठ, रुद्राक्ष माला से महामृत्युंज्य मंत्र का जाप कर रहे हैं.

दिल्ली के प्राचीन गोरी-शंकर मंदिर में सुबह से ही शिव भक्तों का तांता लग गया है. सुबह से ही भक्त जल चढ़ाने के लिए मंदिर पुहंचे हुए हैं. गोरीशंकर मंदिर में दूर दूर से लोग जल चढ़ाने पुहंचे जहा लोगो की इस मंदिर में बहुत मान्यता है और लोग 30-40 सालो से इसी मंदिर में जल चढ़ाने आते है. महिला, पुरुष, बच्चे सब यहां दूर-दूर से शिव के दर्शन के लिए आये हुए हैं.

शिवरात्रि के मौके पर त्रोयदशी और चतुर्दशी में जल चढ़ाते है. ऐसे में त्रोयदशी 29 जुलाई (सोमवार) को शाम पांच बजकर 9 मिनट से शुरू हो गया. इसी समय से जलाभिषेक भी शुरू हो गया. इसके बाद 30 जुलाई को 2 बजकर 49 मिनट पर चतुर्दशी प्रारंभ होगा.

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