तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी अंदरूनी कलह और बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी की पार्टी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि टीएमसी कभी एक वास्तविक राजनीतिक दल नहीं रही, बल्कि अवसरवादी लोगों का ऐसा समूह थी जो सत्ता के लिए साथ आया था. अब वही लोग एक-दूसरे के खिलाफ FIR दर्ज करा रहे हैं और पार्टी के भीतर छिपे विवाद खुलकर सामने आ गए हैं.
'सत्ता बंटवारे का मॉडल पूरी तरह विफल हो गया'समिक भट्टाचार्य ने कहा कि टीएमसी के भीतर सत्ता साझा करने की व्यवस्था अब पूरी तरह टूट चुकी है. उनके मुताबिक, पार्टी के नेता अब संगठन की बजाय खुद को बचाने में लगे हैं. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा घटनाक्रम से साफ है कि टीएमसी के अंदर लंबे समय से चल रहे मतभेद अब खुली लड़ाई में बदल चुके हैं.
ऋतब्रत बनर्जी और सहयोगियों के खिलाफ नई FIRइस बीच, ममता बनर्जी समर्थक गुट ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी और उनके सहयोगियों के खिलाफ नई पुलिस शिकायत दर्ज कराई है. टीएमसी की संयुक्त राष्ट्रीय सचिव डोला सेन की ओर से दायर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ऋतब्रत बनर्जी, पूर्व मंत्री अरूप रॉय, जावेद खान, संदीपन साहा और बिप्लब मित्रा बिना पार्टी की अनुमति के टीएमसी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक पदों का इस्तेमाल कर कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भ्रमित कर रहे हैं.
'पार्टी की समानांतर संरचना खड़ी करने की कोशिश'शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बागी गुट खुद को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के पदाधिकारी बताकर समानांतर संगठन चलाने की कोशिश कर रहा है. ममता समर्थक गुट का कहना है कि इससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच रहा है और कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है.
बागी गुट ने बनाई नई कार्यसमितिहाल ही में बागी गुट ने न्यू टाउन के एक होटल में विशेष बैठक आयोजित कर नई राष्ट्रीय कार्यसमिति की घोषणा की थी, जिसमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को शामिल नहीं किया गया. इसके बाद टॉपसिया में हुई एक और बैठक में कोलकाता नगर निगम के 47 पूर्व पार्षदों की मौजूदगी ने इस गुट की सक्रियता को और बढ़ा दिया.
ऋतब्रत बनर्जी ने आरोपों को किया खारिजऋतब्रत बनर्जी ने अपने खिलाफ दर्ज शिकायतों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायत दर्ज कराना किसी का भी अधिकार है. उन्होंने कहा कि देश में कानून और चुनाव आयोग मौजूद हैं, इसलिए सभी को न्यायिक प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर भरोसा रखना चाहिए.
