बंदी साई भागीरथ के खिलाफ चल रहे POCSO मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. साइबराबाद पुलिस ने आरोपी का iPhone फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फोन में नाबालिग पीड़िता की कोई फोटो, वीडियो या अन्य डिजिटल सबूत मौजूद हैं या नहीं. साई भागीरथ केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे हैं. वह फिलहाल चेरलापल्ली जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं. पीड़िता 17 साल की नाबालिग लड़की बताई गई है.

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पुलिस ने जांच के दौरान आरोपी का iPhone जब्त किया था. बाद में अदालत से अनुमति लेने के बाद फोन को हैदराबाद स्थित फोरेंसिक साइंस लैब भेजा गया. फोरेंसिक विशेषज्ञ अब फोन से डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने की कोशिश करेंगे. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाना चाहती हैं कि क्या आरोपी ने किसी तरह के सबूत मिटाने की कोशिश की थी.

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आरोपी के खिलाफ BNS की धारा

पुलिस के मुताबिक, फोन में मौजूद कॉल लॉग, चैट हिस्ट्री, लोकेशन डेटा और मीडिया फाइलों की भी जांच की जाएगी. यह भी देखा जाएगा कि क्या किसी फोटो या वीडियो को किसी और के साथ शेयर किया गया था. जांच में एक और अहम पहलू यह है कि क्या भागीरथ के अन्य लड़कियों के साथ भी इसी तरह के संबंध थे. अगर ऐसे सबूत मिलते हैं तो मामले में और पीड़ित सामने आ सकते हैं. पुलिस पहले ही आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 64(2)(M) जोड़ चुकी है. यह धारा एक ही पीड़िता के साथ बार-बार रेप के आरोपों से जुड़ी है. इस अपराध में उम्रकैद तक की सजा हो सकती है.

फोरेंसिक जांच जरूरी मानी गई

पुलिस का कहना है कि पीड़िता के बयान के आधार पर शक हुआ कि आरोपी ने कुछ रिकॉर्डिंग या तस्वीरें बनाई हो सकती हैं. इसी वजह से डिजिटल सबूत जुटाने के लिए फोन की फोरेंसिक जांच जरूरी मानी गई. फोन को 18 मई 2026 को फोरेंसिक विभाग भेजा गया था. रिपोर्ट आने में कुछ दिन या हफ्ते लग सकते हैं. फोरेंसिक विशेषज्ञ खास सॉफ्टवेयर की मदद से डिलीट फाइलों को वापस लाने की कोशिश करेंगे. भागीरथ के वकीलों का कहना है कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और वह जांच में पूरा सहयोग करेगा. फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े अन्य संभावित गवाहों के बयान भी दर्ज कर रही है. आगे की कार्रवाई फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद तय की जाएगी.

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