'आस्था साबित करने के लिए मंदिर जाना जरूरी नहीं', सबरीमाला मंदिर मामले पर सुनवाई में हिंदुत्व पर SC की अहम टिप्पणी
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि हिंदुत्व को जीवनशैली कहा जाता है. हिंदू बने रहने के लिए मंदिर जाना या कोई अनुष्ठान करना अनिवार्य नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (13 मई, 2026) को कहा कि हिंदुत्व जीवनशैली है और किसी हिंदू को हिंदू बने रहने के लिए मंदिर जाना या कोई अनुष्ठान करना अनिवार्य नहीं है यहां तक कि घर के अंदर दीपक जलाना भी आस्था साबित करने के लिए पर्याप्त है.
सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और दाऊदी बोहरा समुदाय सहित कई धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में नौ जजों की संविधान बेंच इन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.
इस मामले में सुनवाई का बुधवार को 15वां दिन है. सुनवाई शुरू होने पर एक हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से पेश हुए एडवोकेट डॉ. जी मोहन गोपाल ने कहा कि धार्मिक समुदायों के भीतर से सामाजिक न्याय की मांग उठ रही है. उन्होंने कहा, 'हिंदू धर्म को एक धार्मिक श्रेणी के रूप में परिभाषित किया गया था. उसके बाद 1966 में यह माना गया कि हिंदू वह है जो धर्म और दर्शन के सभी मामलों में वेदों को सर्वोच्च मानता है. उन्होंने मुझसे कभी नहीं पूछा. हममें से किसी ने भी ऐसा कभी नहीं कहा.'
उन्होंने कहा, 'मेरा वेदों के प्रति अत्यंत आदरभाव है, लेकिन क्या यह सच है कि आज हिंदू कहलाने वाला हर व्यक्ति आध्यात्मिक और दार्शनिक मामलों में वेदों को सर्वोच्च मानता है?' उनकी दलील पर जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा, 'इसीलिए हिंदुत्व को जीवनशैली कहा जाता है. हिंदू बने रहने के लिए मंदिर जाना या कोई अनुष्ठान करना अनिवार्य नहीं है.'
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जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि किसी को कर्मकांडी होने की जरूरत नहीं है और आस्था रखने वाले लोगों के रास्ते में कोई बाधा नहीं बन सकता. सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने घर में एक दीपक भी जलाता है, तो यह उसके धर्म को साबित करने के लिए पर्याप्त है.'
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सितंबर 2018 में पांच जजों की संविधान पीठ ने बहुमत से फैसला सुनाते हुए सबरीमाला अयप्पा मंदिर में 10 से 50 साल की आयु वाली महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था और फैसला सुनाया था कि सदियों पुरानी हिंदू धार्मिक प्रथा अवैध और असंवैधानिक है.






















