नई दिल्ली: जेएनयू में छात्रों के साथ हुई मारपीट को करीब 17 दिन हो गए हैं, लेकिन पुलिस अभी तक किसी को गिरफ्तार नही कर पाई है. एक आरटीआई ने पुलिस को दी गई शिकायत पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. आरटीआई के तहत पूछे गए एक सवाल के बाद ये खुलासा हुआ है कि सर्वर रूम के बॉयोमेट्रिक सिस्टम नहीं तोड़े गए थे.

पांच जनवरी को जेएनयू में हुई हिंसा के दौरान सर्वर रूम में बॉयोमेट्रिक सिस्टम को तोड़ने की बात एफआईआर में लिखी गई थी, लेकिन एक आरटीआई के जवाब में जेएनयू प्रशासन ने कहा है कि, हिंसा के दौरान कोई भी बॉयोमेट्रिक सिस्टम नहीं टूटा था. आरटीआई में पूछा गया की 30 दिसंबर 2019 से 8 जनवरी 2020 के बीच सर्वर रूम में कितने बॉयोमेट्रिक सिस्टम तोड़े गए. जिसके जवाब में जेएनयू प्रशासन ने एक भी बॉयोमेट्रिक सिस्टम ना टूटने की बात कही है. एफआईआर में लिखी गई शिकायत और आरटीआई में दिए गए जवाब में सामने आई जानकारी में अलग-अलग बात से कई तरह के सवाल खडे़ हो गए हैं.

3 जनवरी और 4 जनवरी को बंद हुए थे सर्वर आरटीआई के जवाब में जेएनयू प्रशासन ने बताया की 30 दिसंबर 2019 से 8 जनवरी 2020 के बीच दो बार सीआईएस के ऑफिस में सर्वर डाउन हुआ था. इतना ही नहीं 4 जनवरी को सर्वर रूम की 17 फाइबर केबल तोड़ी गईं थी. जिसे दोपहर करीब 1 बजे के आसपास तोड़ा गया था.

17 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली इस मामले को 17 दिन पूरे होने को हैं. लेकिन दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच जांच जारी की बात कह कर पल्ला झाड़ रही है. नकाब में दिख रहे बाहरी लोग कौन हैं और कैसे जेएनयू परिसर में घुसे. इन सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिल पाए हैं.

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