CJP आंदोलन के वक्त पीएम मोदी को Gen-Z को लेकर सलाह देने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने रविवार को उन (Gen-Z) पर तंज कसा है. इस बार उन्होंने कहा है कि ‘Gen-Z’ वाले दूसरों की देखा-देखी चीजें करते हैं, भावुक होते हैं और शांत मन से नहीं सोचते.

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भागवत ने कहा कि ‘Gen-Z’ वालों को जो बात सही लगती है, उसी की ओर वे आकर्षित हो जाते हैं. ‘Gen-Z’ उस पीढ़ी को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है. इससे पहले CJP आंदोलन के वक्त RSS चीफ ने कहा था कि शासन या व्यवहार में तानाशाही या आदेश की जगह चर्चा (Discussion) और आपसी सहमति (Consensus) का तरीका अपनाना चाहिए.

RSS प्रमुख ने कहा कि ‘‘विवाह एक अनुशासन है, जो धर्म के संस्कार देता है. इसका विकल्प लिव इन रिलेशनशिप है. इसके परिणाम क्या हैं? हमें जिम्मेदारियां नहीं, बल्कि सिर्फ खुशी चाहिए. जब तक मन हो साथ रहो और जब मन न हो तो अलग हो जाओ. कोई जिम्मेदारी नहीं. इससे क्या बढ़ेगा? क्या बढ़ रहा है, दुनिया भर में यह देखा जा सकता है.’’

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LGBTQ को लेकर क्या बोले मोहन भागवत?

मोहन भागवत ने कहा किआधुनिकता भी जरूरी है और समय के साथ बदलना भी देश की परंपराओं का एक नियम है. लिव इन रिलेशनशिप का परोक्ष रूप से उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह पश्चिमी संस्कृति का अंधानुकरण है. भागवत ने कहा कि आधुनिकता का स्वागत किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि एलजीबीटीक्यू समुदाय समाज का हिस्सा है और उन्हें हीन दृष्टि से नहीं देखना चाहिए.

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बच्चों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भागवत की सलाह

भागवत ने कहा कि माता-पिता को मोबाइल फोन के इस्तेमाल में अनुशासन अपनाना चाहिए. उन्होंने नयी पीढ़ी के बच्चों के सवालों के जवाब देने और परिवार से जुड़े विभिन्न मुद्दों को सुलझाने के लिए परिवार के सदस्यों के बीच बातचीत को भी महत्वपूर्ण बताया. मोबाइल फोन का बहुत ज्यादा इस्तेमाल समेत नयी पीढ़ी की जीवनशैली को लेकर माता-पिता की चिंताओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बड़ों को खुद वैसा ही आचरण करना चाहिए जैसा वे नयी पीढ़ी में देखना चाहते हैं.

सरकार से नहीं खुद से हो शुरुआत

भागवत ने कहा, “समाज में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, उसकी शुरुआत खुद से करें. सोशल मीडिया पर अपना समय कम करें. मोबाइल के इस्तेमाल में अनुशासन बरतें. हम सरकार की ओर देखते हैं. हमारी परंपरा में सरकार का स्थान दूसरा है, समाज का पहला. (हम कहते हैं कि) सरकार को यह या वह कानून बनाना चाहिए...जबकि हम खुद अपने घर पर भी ऐसा कर सकते हैं.” उन्होंने कहा, “हम बच्चों को मोबाइल के इस्तेमाल के नियम तो बताते हैं, लेकिन खुद मोबाइल से इतने जुड़े हुए हैं कि बच्चा रोने पर मां उसे मोबाइल थमा देती है.”

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इनपुट-भाषा