देश की राजधानी दिल्ली में स्थित जंतर-मंतर पर जुलाई, 2024 में महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार (6 जून, 2026) को कांग्रेस पार्ट की महिला विंग की अध्यक्ष अलका लांबा को नेकचलनी या अच्छे आचरण (Probation of Good Conduct) की शर्त पर रिहा किया है.

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हालांकि, राउज एवेन्यू कोर्ट ने अलका लांबा को मामले में दोषी ठहराया है, लेकिन एक साल तक उनकी नेकचलनी (Probation of Good Conduct) को ध्यान में रखते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश जारी किया है. इसके साथ-साथ कोर्ट ने दोषी अलका लांबा को एक लाख रुपये मूल्य का बॉन्ड भरने का भी आदेश दिया है.

अच्छे आचरण की शर्त पर कोर्ट से की रिहाई की मांग

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दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट ने पिछले महीने 25 मई, 2026 को मामले पर सुनवाई करते हुए कांग्रेस पार्टी की महिला विंग के अध्यक्ष अलका लांबा को दोषी ठहराया था. हालांकि, इस एक साल में अलका लांबा की तरफ से नेकचलनी और अच्छे आचरण के आधार पर उन्हें जेल से रिहा करने की मांग की गई थी.

अलका लांबा के ऊपर क्या-क्या लगे थे आरोप?

कांग्रेस नेता अलका लांबा पर विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकारी कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की करने, काम में बाधा डालने के साथ-साथ कानूनी आदेश की अवहेलना करने और सार्वजनिक रास्ता रोकने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 132, 221, 223(a) और 285 के तहत केस चल रहा था, जिसमें कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया था.

अलका लांबा के नेतृत्व में महिला कांग्रेस ने किया था प्रदर्शन

उल्लेखनीय है कि जुलाई 2024 में महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा के नेतृत्व में महिला कांग्रेस ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था. इस मामले में अदालत की तरफ दोषी पाए जाने के बाद लांबा ने कहा कि मुझे यही उम्मीद थी कि यही होने वाला है. जुलाई 2024 का मामला है. मानसून सत्र चल रहा था. उस दौरान महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मैं और मेरी सारी बहनें जंतर-मंतर पर संवैधानिक अधिकार के तहत महिला आरक्षण लागू करो की मांग को आंदोलन किया था. 

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