नई TMC में अभिषेक बनर्जी को मिलेगी जगह? ऋतब्रत बनर्जी से किया साफ, बोले- चोरों की तरह...
Bengal Political Crisis: ऋतब्रत ने साफ किया कि अब पार्टी में अभिषेक बनर्जी की कोई भूमिका नहीं रहेगी. हालांकि उन्होंने ये भी साफ किया कि उनकी नेता ममता बनर्जी ही हैं.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के एक महीने बाद तृणमूल कांग्रेस में टूट की खबर अब आधिकारिक हो गई है. विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने पार्टी से निष्कासित विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा के नेतृत्व में बगावत कर दी. विधानसभा स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दी. इसके साथ ही ऋतब्रत ने साफ किया कि अब पार्टी में अभिषेक बनर्जी की कोई भूमिका नहीं रहेगी. हालांकि उन्होंने ये भी साफ किया कि उनकी नेता ममता बनर्जी ही हैं.
नई TMC में अभिषेक बनर्जी की भूमिका
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, 'अभिषेक बनर्जी की कोई भूमिका ही नहीं रहेगी. उनके साथ हमारी पार्टी का कोई संबंध नहीं है. उनके साथ हमारी आवाम का भी दूर-दूर कोई संबंध नहीं है. अगर संबंध होता तो वे 26 दिनों तक छिपे नहीं रहते, बल्कि बाहर निकलकर आते. जैसे चोरों को पीटा जाता है वैसे उन्हें पीटा गया. हम में से किसी नेता ने भी न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार से सुरक्षा की मांग नहीं की और अभिषेक बनर्जी उस दिन चोरों की तरह पिटाई खाने के बाद कह रहे थे कि आवाम उनकी रक्षा करेगी. फिर देखा गया कि उन्होंने केंद्र सरकार को अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए पत्र दिया.
पार्टी का नेतृत्व करती रहें ममता बनर्जी: ऋतब्रत
उन्होंने कहा, 'हम लोग उन्हें लेकर चर्चा नहीं करना चाहते हैं. जहां तक ममता बनर्जी की बात है तो हम मानते हैं कि ममता बनर्जी बहुत वरिष्ठ नेत्री हैं और हमारी उनसे मांग रहेगी कि वे हमारी मुख्य सलाहकार की तरह हमारी पार्टी का नेतृत्व करती रहें. हमने अभी-अभी चिट्ठी सौंपी है. नेता प्रतिपक्ष (LoP) के लिए तय कमरा आधिकारिक तौर पर अलॉट कर दिया गया है. नेता प्रतिपक्ष अभी वहीं बैठे हैं.'
अभिषेक बनर्जी पर भड़के ऋतब्रत
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, 'हमारी इच्छा है कि ममता बनर्जी हमारी सलाहकार बनी रहें और हमें अपनी सलाह देती रहें, ताकि हम, नेता प्रतिपक्ष और मुख्य सचेतक के साथ मिलकर, विधानसभा के अंदर पार्टी को प्रभावी ढंग से चला सकें. पार्टी की जो बुरी हालत आज हो गई है, कुछ हद तक, वह अभिषेक बनर्जी की नाकामी है. आखिर, अगर जब सब कुछ अच्छा होता है तो आप उसका श्रेय लेते हैं, तो जब चीजें गलत होती हैं तो आपको उसकी जम्मेदारी भी लेनी चाहिए.'
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