किस हथियार ने की PAK की हालत खराब? रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने खोला ऑपरेशन सिंदूर का राज
सेवानिवृत्त एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर को वर्षों की तैयारी, रणनीतिक सोच और स्वदेशी तकनीक का परिणाम बताया. उन्होंने कहा कि हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और सटीक हमलों में अहम भूमिका निभाई.

राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ और सेवानिवृत्त एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर को सिर्फ एक सैन्य अभियान मानने से इनकार करते हुए इसे वर्षों की तैयारी, तकनीकी विकास और रणनीतिक सोच का परिणाम बताया. नई दिल्ली में आज तक के एक कार्यक्रम में बोलते हुए मिश्रा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और वायुसेना के जवानों की सामूहिक मेहनत का नतीजा था.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व कर चुके मिश्रा ने अपने नए पद को लेकर ज्यादा बात नहीं की. उन्होंने कहा कि वह अभी औपचारिक रूप से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ का पदभार नहीं संभाले हैं. पूर्व वायुसेना अधिकारी 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए थे.
आधुनिक युद्ध में तकनीक और योजना की बढ़ती भूमिका
मिश्रा ने कहा कि आज युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं लड़े जाते, बल्कि उन्नत तकनीक, बेहतर योजना और स्वदेशी क्षमताएं भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती हैं.
उन्होंने तकनीक की बढ़ती भूमिका को समझाते हुए उदाहरण दिया कि जब कोई व्यक्ति पेट्रोल पंप पर एटीएम कार्ड स्वाइप करता है तो सैटेलाइट से जुड़े सिस्टम तुरंत बैंकिंग नेटवर्क से संपर्क करते हैं और लेनदेन पूरा हो जाता है.
मिश्रा के मुताबिक, भविष्य के युद्ध भी इसी तरह आपस में जुड़े तकनीकी सिस्टम पर निर्भर होंगे, जो आम लोगों की नजरों से काफी हद तक दूर रहकर काम करेंगे.
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता में तेजी से हो रहे विकास ने बदलाव की रफ्तार और बढ़ा दी है. जो देश इस रफ्तार के साथ खुद को नहीं बदल पाएंगे, वे कुछ ही वर्षों में दूसरे देशों से पीछे छूट सकते हैं.
250 से 300 किमी दूर तक सटीक हमला करने की क्षमता
मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय तकनीक का एक तरह का चमत्कार बताया. उन्होंने कहा कि भारत ने 250 से 300 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्यों को करीब दो मीटर की सटीकता से निशाना बनाने की क्षमता प्रभावी तरीके से प्रदर्शित की.
उन्होंने कहा कि ऐसी क्षमताओं को बनाए रखने के लिए लगातार सीखना और तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करना जरूरी है.
मिश्रा के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और सटीक हमले करने में इस्तेमाल हुए सिस्टम वर्षों की लगातार मेहनत का परिणाम थे.
बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर में अंतर बताया
2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर की तुलना करते हुए मिश्रा ने कहा कि बालाकोट के समय भी भारतीय वायुसेना के पास जरूरी क्षमताएं मौजूद थीं. उनके मुताबिक, अंतर संसाधनों का नहीं बल्कि अलग-अलग समय पर लिए गए रणनीतिक फैसलों का था.
उन्होंने बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर को सीमा पार से आने वाले खतरों के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया के क्रम का हिस्सा बताया. यह प्रक्रिया उरी हमले के बाद शुरू हुई थी. मिश्रा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को इस क्रम का अंतिम चरण नहीं माना जाना चाहिए.
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