नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने एससी-एसटी को प्रमोशन में आरक्षण के लिए हरी झंडी दे दी है. सरकार ने आधिकारिक आदेश जारी करते हुए सभी राज्यों और मंत्रालयों से कहा कि एससी और एसटी कोटे में प्रमोशन में पर अमल किया जाए. केंद्र सरकार का यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद आया है जिसमें कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार प्रमोशन में आरक्षण दे सकती है लेकिन यह सुप्रीम कोर्ट के आखिरी आदेश पर निर्भर करेगा. केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील की थी जिसमें प्रमोशन में आरक्षण रद्द कर दिया गया था.

बुधवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में भाग लेने के बाद राम विलास पासवान ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर संदेह था कि यह सिर्फ केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए लागू है या राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए भी. मंत्रियों की बैठक में यह साफ किया गया कि आरक्षण केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों दोनों के लिए हैं."

ध्यान रहे की प्रमोशन में आरक्षण का मसला काफी विवादित रहा है. दलितों के हिमायती इस मसले पर लगातार सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं. उनका मानना है कि सरकार की तरफ से अदालत में मजबूती से पक्ष नहीं रखने की वजह से प्रमोशन में आरक्षण नहीं मिल रहा है. पिछले दिनों जब एससी/एसटी एक्ट (तुरंत गिरफ्तारी पर रोक) पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया तो प्रमोशन में आरक्षण की मांग नये सिरे से शुरू हो गई.

साल 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बिना मात्रात्मक डेटा के SC/ST को प्रमोशन में आरक्षण नहीं दिया जा सकता है. प्रमोशन में आरक्षण कर रहे वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि ये साबित करना जरूरी है कि नौकरी में SC/ST का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है और इसके लिए डेटा देना होगा. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ तब याचिका दाखिल की गई. इस याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पांच जजों की पीठ का गठन किया है.