भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की, एक निजी राजनीतिक परामर्श कंपनी के कार्यालय पर ईडी की छापेमारी के दौरान उनके आचरण को लेकर शुक्रवार (9 जनवरी, 2026) को निंदा की. केंद्र में सत्तारूढ़ और पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाया कि बनर्जी के कृत्यों से संकेत मिलता है कि उन्होंने कुछ संवेदनशील चीज को बचाने की कोशिश की, जिससे वह और उनकी पार्टी कथित कोयला तस्करी से जुड़े धनशोधन के मामले में फंस सकती हैं.

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भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यहां भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों को धमकाने और छापेमारी के दौरान उनसे दस्तावेज ‘छीनने’ के लिए आरोपी बनाया जाना चाहिए.

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'ममता बनर्जी की बर्बर कार्रवाई की परिस्थितियां संदिग्ध हैं.' उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी, राज्य पुलिस अधिकारियों के साथ, एक निजी परामर्श कंपनी के परिसर में जबरन दाखिल हुईं, जहां एक जांच चल रही थी. उन्होंने ईडी के जांच अधिकारियों को धमकाया और ‘कागजात छीनकर’ अपने साथ ले गईं.

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उन्होंने कहा, 'पिछले 14 सालों से मुख्यमंत्री रहने के कारण उन्हें शासन के तौर-तरीकों की अच्छी जानकारी है. वे अतीत में केंद्रीय मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं.' रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाते हुए सवाल किया, 'इसका मतलब है कि वह कोई संवेदनशील चीज बचाने की कोशिश कर रही थीं, जो उन्हें और उनके दल को फंसा सकती थी. इसके अलावा और क्या अनुमान लगाया जा सकता है? उन्हें किस बात का डर था?'

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कथित कोयला तस्करी से जुड़े धनशोधन मामले में छापेमारी के दौरान कोलकाता में आई-पैक के निदेशक प्रतीक जैन के आवास में जबरन दाखिल हुईं और दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों सहित ‘महत्वपूर्ण’ सबूत अपने साथ ले गईं.

भाजपा नेता ने कहा, 'हम ममता बनर्जी के गैरजिम्मेदाराना आचरण की कड़ी निंदा करते हैं. जांच में बाधा डालना और फाइलें छीन लेना गंभीर अपराध हैं. ममता गंभीर आपराधिक मामलों की दोषी हैं. प्रथम दृष्टया उनके आचरण के लिए उन पर गंभीर आपराधिक प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए.' उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी की छापेमारी के दौरान बनर्जी का आचरण ‘अनैतिक, गैरजिम्मेदार और असंवैधानिक’ था. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अपने कृत्यों से उन्होंने पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया और शासन व्यवस्था को ‘शर्मिंदा’ कर दिया है.

 

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