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Rajya Sabha Election 2026: 26 सीटें 28 कैंडिडेट, क्रॉस वोटिंग से बदलेगा राज्यसभा का नंबर गेम, किसे फायदा, किसे नुकसान, जानें A टू Z समीकरण

Rajya Sabha Election 2026: देश के 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव होने वाले हैं. इस बीच मध्य प्रदेश और झारखंड में अतिरिक्त उम्मीदवारों से मुकाबला रोचक हो गया है.

देश के 12 राज्यों में राज्यसभा की 26 सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होंगे. इनमें 24 नियमित सीटें और 2 उपचुनाव की सीटें शामिल हैं. इन सीटों के लिए कुल 28 उम्मीदवार मैदान में हैं. इस चुनाव पर पूरे देश की नजर है, क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंचता दिखाई दे रहा है. खास तौर पर मध्य प्रदेश और झारखंड में भाजपा समर्थित अतिरिक्त उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है.

इन चुनावों की घोषणा कई बड़े नेताओं का कार्यकाल समाप्त होने के कारण की गई है. इनमें पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं.

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मध्य प्रदेश और झारखंड में भाजपा की नई रणनीति

भाजपा ने मध्य प्रदेश में तय संख्या से एक अतिरिक्त उम्मीदवार उतारकर और झारखंड में निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन देकर विपक्ष की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. संख्या बल के हिसाब से झारखंड की दोनों सीटें सत्तारूढ़ INDIA गठबंधन को और मध्य प्रदेश में एक सीट कांग्रेस को मिलनी चाहिए, लेकिन अतिरिक्त उम्मीदवारों के कारण अब मुकाबला रोचक हो गया है. राज्यसभा की 24 सीटों और तीन सीटों के उपचुनाव में अधिकांश राज्यों में उम्मीदवारों का चयन विधानसभा में दलों की संख्या के अनुसार किया गया है, लेकिन मध्य प्रदेश और झारखंड में सीटों से अधिक उम्मीदवार होने के कारण चुनाव के साथ-साथ क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक जोड़-तोड़ की चर्चा भी तेज हो गई है.

मध्य प्रदेश में क्या है स्थिति?

मध्य प्रदेश में तीन सीटों के लिए भाजपा ने तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है. 230 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान प्रभावी संख्या 228 है और एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत है. भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं. संख्या के हिसाब से भाजपा को दो सीटें और कांग्रेस को एक सीट मिलनी तय मानी जा रही है. हालांकि भाजपा के तीसरे उम्मीदवार के मैदान में आने से राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं.

अगर कांग्रेस के दो विधायक भी मतदान नहीं कर पाते हैं, तब भी उसके पास 62 विधायक रहेंगे, जो एक सीट जीतने के लिए जरूरी 58 वोटों से चार अधिक हैं. भाजपा के दो उम्मीदवारों के लिए आवश्यक वोटों से उसके पास 48 वोट अतिरिक्त हैं. तीसरी सीट जीतने के लिए उसे लगभग 10 और वोटों की जरूरत होगी. यह तभी संभव होगा जब कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग हो. यदि कांग्रेस को 58 से कम वोट मिलते हैं तो मामला दूसरी वरीयता के वोटों तक जा सकता है.

झारखंड में कैसे बदल सकते हैं समीकरण?

झारखंड में INDIA गठबंधन के पास 56 विधायक हैं और दोनों सीटें जीतने के लिए भी 56 वोटों की जरूरत है, लेकिन भाजपा और NDA के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के मैदान में आने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है. राजग के पास 24 विधायक हैं और अपने समर्थित उम्मीदवार को जिताने के लिए उसे विपक्षी खेमे से कम से कम चार अतिरिक्त वोट चाहिए होंगे. अगर किसी उम्मीदवार को जरूरी 28 वोट नहीं मिलते हैं तो फैसला दूसरी वरीयता के वोटों से होगा.

अन्य राज्यों में क्या है स्थिति?

भाजपा ने गुजरात में 4 सीटों पर राजूभाई शुक्ला, मुकेश राठवा, मानसिंह परमार और जितेंद्र कंजारिया को उम्मीदवार बनाया है. 182 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 161 विधायक हैं और विपक्षी पार्टी ने अपनी तरफ से किसी भी उम्मीदवार को नहीं उतारा है, इसलिए भाजपा की चारों सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है. आंध्र प्रदेश के 4 राज्यसभा सीटों पर टीडीपी ने साना सतीश बाबू, बश्याम रामकृष्ण और चिंताकायला विजय को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जनसेना की ओर से लिंगमनेनी रमेश मैदान में हैं.  राजस्थान में राज्यसभा की 3 सीट है. इस पर कांग्रेस ने अपनी तरफ से नीरज डांगी को दोबारा उम्मीदवार बनाया है. इसके अलावा भाजपा ने 2 सीटों पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और अलका गुर्जर को उम्मीदवार बनाया है. कर्नाटक में राज्यसभा की 4 सीट है. इसमें 3 सीटों पर कांग्रेस ने मल्लिकार्जुन खरगे, पवन खेड़ा और मंसूर अली खान को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने एक सीट पर एम. नागराज को मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने भाजपा पर पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा को टिकट नहीं देने का आरोप लगाया है.

पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिति

मणिपुर में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अधिकारिमयुम शारदा देवी उम्मीदवार हैं. अरुणाचल प्रदेश में वरिष्ठ भाजपा नेता ताई तागक मैदान में हैं. मेघालय में नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) की ओर से मुख्यमंत्री कोनराड संगमा के भाई जेम्स के. संगमा उम्मीदवार हैं. मिजोरम में सत्ताधारी जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) ने के. लालतुलुआंगकिमा को उम्मीदवार बनाया है.

राज्यसभा में NDA दो-तिहाई बहुमत के करीब

2026 के राज्यसभा चुनाव राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. 245 सदस्यीय राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सीटों की जरूरत होती है. इसमें साधारण बहुमत के लिए 123 और दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सीटों की जरूरत होती है. वर्तमान में NDA के पास 148 सांसद हैं, जिनमें भाजपा के लगभग 113-114 सांसद शामिल हैं. INDIA ब्लॉक के पास लगभग 66 सांसद हैं, जबकि बाकी सीटें अन्य क्षेत्रीय दलों के पास हैं. NDA पहले ही साधारण बहुमत का आंकड़ा पार कर चुका है और अब उसका लक्ष्य 164 सीटों तक पहुंचना है.

NDA की ताकत क्यों बढ़ रही है?

2026 में राज्यसभा की 72 सीटों के लिए अलग-अलग चरणों में चुनाव हो रहे हैं. NDA की स्थिति मजबूत होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. आंध्र प्रदेश में टीडीपी और जनसेना के अच्छे प्रदर्शन का फायदा NDA को मिल रहा है. गुजरात जैसे राज्यों में भाजपा का भारी बहुमत उसे आसानी से सीटें दिला रहा है. ओडिशा और महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति ने भी गठबंधन को मजबूत किया है. मध्य प्रदेश और झारखंड में अतिरिक्त उम्मीदवार उतारकर भाजपा क्रॉस वोटिंग के जरिए अतिरिक्त सीटें जीतने की रणनीति अपना रही है. इसके अलावा राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्यों का समर्थन भी कई मामलों में NDA की ताकत बढ़ा सकता है.

164 सीटों का क्या महत्व है?

NDA राज्यसभा में अगर 164 सीटों का आंकड़ा हासिल कर लेता है तो यह उसके लिए राजनीतिक रूप से बड़ी उपलब्धि होगी. 18 जून के चुनाव और उसके बाद नवंबर में होने वाले चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि NDA दो-तिहाई बहुमत के इस लक्ष्य तक पहुंचता है या उसके बेहद करीब रुकता है.

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