नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किये जाने और राज्य को दो हिस्सों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांटकर केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के फैसलों का विपक्षी दलों का विरोध जारी है. इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के साथ घाटी में जाने की कोशिश की. लेकिन जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उन्हें श्रीनगर में एयरपोर्ट पर ही रोक दिया और वापस दिल्ली भेज दिया. प्रशासन ने पहले ही कहा था कि वह नेताओं को कश्मीर आने की अनुमति नहीं देगा.
राहुल गांधी के साथ माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा महासचिव डी राजा, लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव, आरजेडी के मनोज झा, डीएमके के तिरुचि शिवा, तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी समेत 9 दलों के नेता मौजूद थे. विपक्षी दलों का प्रतिनिधिमंडल कश्मीर हालात का जायजा लेने, स्थानीय नेताओं और निवासियों से मुलाकात करने जा रहा था.
कांग्रेस का हमला
विपक्षी दलों के नेताओं को वापस दिल्ली भेजे जाने पर राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने मुझे आमंत्रित किया है. राज्यपाल ने कहा था कि मैं आमंत्रित हूं. अब जब मैं आया हूं तो वे कह रहे हैं कि आप नहीं आ सकते. सरकार कह रही है कि हर चीज सामान्य है इसलिए अगर हर चीज सामान्य है तो हमें बाहर जाने की अनुमति क्यों नहीं दे रहे. यह आश्चर्यजनक है.’’ राहुल ने कहा, ‘‘हम किसी भी ऐसे क्षेत्र में जाना चाहते हैं जहां शांति है और 10- 15 लोगों से बात करना चाहते हैं. अगर धारा 144 लागू है तो मैं अकेले जाना चाहता हूं, हमें समूह में नहीं जाना है.’’
वहीं कांग्रेस ने ट्वीट किया, ''यदि सरकार के दावे के अनुसार जम्मू-कश्मीर की स्थिति "सामान्य" है, तो राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को श्रीनगर हवाई अड्डे से वापस क्यों भेजा गया है? मोदी सरकार क्या छिपाने की कोशिश कर रही है?''
कांग्रेस ने पुलिस द्वारा मीडियाकर्मियों के साथ बदसलूकी किये जाने की निंदा की. पार्टी ने कहा, ''श्रीनगर पुलिस द्वारा मीडियाकर्मियों से आक्रामक रूप से पेश आने और उनको विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिलने से रोकने की खबरें आ रही है. हम मीडिया के खिलाफ अपनाए गए कठोर रवैये की कड़ी निंदा करते हैं.''
नेताओं को रोके जाने पर राज्यपाल का बयान
वहीं राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि राहुल गांधी को अभी यहां आने की जरूरत नहीं थी. उनकी जरूरत तब थी जब उनके सहयोगी संसद में बोल रहे थे. यदि वह यहां स्थिति खराब करना चाहते हैं और दिल्ली में उनके द्वारा बताए गए झूठ को दोहराना चाहते हैं, तो यह अच्छा नहीं है.
उन्होंने कहा, ''मैंने उन्हें सद्भावना में आमंत्रित किया था लेकिन उन्होंने राजनीति करना शुरू कर दिया, यह इन लोगों द्वारा राजनीतिक कदम के अलावा कुछ नहीं था. पार्टियों को इस समय राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखना चाहिए.'' जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राहुल गांधी को कश्मीर आने का न्योता दिया था. जिसे राहुल गांधी ने भी स्वीकार किया था और दोनों के बीच जुबानी जंग चली थी.
गौरतलब है कि हाल ही में मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के कई प्रावधान हटाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों को बांटने का कदम उठाया था इसके मद्देनजर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य के कई इलाकों में एहतियातन भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई और मोबाइल एवं इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं.
इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती सहित कई नेताओं को हिरासत में लिया गया या नजरबंद किया गया. कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियां इसकी आलोचना कर रही है.
