भगवान राम पर टिप्पणी मामले में बढ़ी राहुल गांधी की मुश्किल, FIR खारिज करने का आदेश रद्द, अब क्या होगा?
शिकायतकर्ता के अनुसार राहुल गांधी ने भगवान राम को करुणा, क्षमा और धार्मिकता का प्रतीक करार देते हुए उन्हें एक पौराणिक व्यक्ति बताया था. इस टिप्पणी से लाखों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं

भगवान राम पर टिप्पणी मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर खारिज किए जाने का आदेश रद्द कर दिया गया है. वाराणसी की एक सांसद-विधायक अदालत ने बुधवार (10 जून, 2026) को निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज शिकायत खारिज कर दी गई थी. राहुल गांधी के खिलाफ उन टिप्पणियों को लेकर शिकायत दर्ज हुई थी, जिसमें उन्होंने एक अमेरिकी विश्वविद्यालय में भगवान राम को एक पौराणिक और काल्पनिक व्यक्ति बताया था.
मामले से जुड़े वकील हरिशंकर पांडे ने कहा कि शिकायत अमेरिका के बोस्टन में स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी में 2025 में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी के इस बयान से संबंधित है. शिकायतकर्ता के अनुसार राहुल गांधी ने भगवान राम को करुणा, क्षमा और धार्मिकता का प्रतीक करार देते हुए उन्हें एक पौराणिक व्यक्ति बताया था.
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस टिप्पणी से लाखों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. हरिशंकर पांडे ने कहा कि शिकायत को पहले वाराणसी में एक अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (SJM) अदालत ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि यह बयान विदेश में दिया गया था और इसलिए अभियोजन के लिए केंद्र सरकार की ओर से मंजूरी की आवश्यकता होगी.
हरिशंकर पांडे ने कहा कि आदेश के खिलाफ एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए, सांसद-विधायक कोर्ट के जज जस्टिस यजुर्वेद विक्रम सिंह ने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया और कहा कि शिकायत दर्ज होने या उस पर विचार करने के चरण में केंद्र सरकार से पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं है.
हरिशंकर पांडे ने बताया कि अदालत ने कहा कि हालांकि राहुल गांधी संसद सदस्य हैं, लेकिन वह लोक सेवकों की श्रेणी में नहीं आते, जिनके लिए ऐसी परिस्थितियों में विशेष अभियोजन मंजूरी अनिवार्य है. जज ने माना कि शिकायत को तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता. उन्होंने निचली अदालत को मामले पर पुनर्विचार करने और तथ्यों और कानून के अनुसार आदेश पारित करने का निर्देश दिया.




















