नई दिल्ली/ चंडीगढ़: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज से पांच दिन के पंजाब दौरे पर निकलेंगे. केजरीवाल का ये दौरा मनीष सिसोदिया की तरफ से दिए गए बयान के बाद अहम भी हो गया है और दिलचस्प भी.  दो साल पहले दिल्ली चुनाव के वक्त आम आदमी पार्टी ने ‘पांच साल केजरीवाल’ का नारा दिया था, लेकिन लगता है कि दो साल में ही पार्टी अपने इस नारे से पलटने वाली है. ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पंजाब के लोगों को ये साफ कह गए कि आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को आपका वोट केजरीवाल को सीएम बनाने के लिए पड़ेगा. सिसोदिया के इस बयान ने पंजाब से लेकर केंद्र की राजनीति तक में हलचल मचा दी है.

ऐसा नहीं है कि सिसोदिया ने केजरीवाल का नाम ऐसे ही हवा में उछाल दिया है. इसके पीछे की पॉलिटिक्स को देखे तो साफ है कि-

  • पंजाब में आप का कोई सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं है.
  • काफी दिनों से ये चर्चा है कि केजरीवाल पंजाब की कुर्सी संभाल सकते हैं.
  • दिल्ली में केजरीवाल भले ही सीएम हैं, लेकिन उनके पास कोई मंत्रालय नहीं है.
  • दिल्ली की पूरी जिम्मेदारी पहले से ही मनीष सिसोदिया के पास है.
  • दिल्ली में जो बड़े-बड़े पोस्टर लग रहे हैं, उसमें भी सिर्फ सिसादिया ही है.

यानी एक तरह से देखे तो पार्टी पहले से ही इशारा करती आ रही है कि पंजाब में बहुमत मिला तो केजरीवाल यहां की सत्ता संभाल सकते हैं. कल का सिसोदिया का बयान इसी कड़ी का अगला हिस्सा हो सकता है.

अरविंद केजरीवाल का नाम सीएम के लिए उछालने के पीछे एक बड़ी वजह ओपिनियन पोल के आंकड़े भी हो सकते हैं. पिछले हफ्ते हमने जो ओपिनियन पोल किया था उसमें बीजेपी अकाली नंबर एक और कांग्रेस दूसरे नंबर पर थी. जबकि आप को 12 से 18 सीटें ही मिलती दिख रही थी.

लगता यही है कि इस स्थिति को आम आदमी पार्टी के नेता समझ चुके है और इसी क़डी में माहौल बनाने के लिए सिसोदिया ने आज ऐसा बयान उछाला हो, लेकिन सवाल ये है कि क्या केजरीवाल दिल्ली के लोगों से किया वादा तोड़ देंगे.

मोटी बात ये है कि राजनीति में कुछ कहा नहीं जा सकता. फिलहाल बादल-अमरिंदर के टक्कर में केजरीवाल का नाम पेश करके सिसोदिया ने पंजाब की पॉलिटिक्स को नया टर्न दे दिया है.