पंजाब के सियासी गलियारों में इन दिनों सवाल घूम रहे हैं कि क्या एक बार फिर बीजेपी और अकाली दल साथ आएगी? अटकलों के पीछे कई वजहे हैं. पूर्व डिप्टी सीएम और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के चीफ सुखबीर सिंह बादल पर गुरुवार (13 अगस्त) को महाराष्ट्र के नांदेड़ में हमला हुआ. इस हमले में सुखबीर बादल के हाथ में गंभीर चोट आई है. इस घटना के ठीक बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी पत्नी हरसिमरत कौर बादल को फोन कर सुखबीर बादल के स्वास्थ्य की जानकारी ली. 

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पीएम मोदी के फोन कॉल के बाद हरसिमरत कौर ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि मैं प्रधानमंत्री की बहुत आभारी हूं कि आपने सरदार सुखबीर सिंह बादल जी की सेहत के बारे में जानने के लिए व्यक्तिगत रूप से फोन किया और महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक गुरुद्वारा साहिब के अंदर उन पर हुए कायराना हमले के बाद उनके जल्द ठीक होने की कामना की.

हरसिमरत कौर ने जताया आभारउन्होंने आगे कहा कि इस मुश्किल समय में आपकी चिंता, समर्थन और शुभकामनाएं हम सभी परिवार वालों, हमारी पार्टी और पंजाब के लोगों के लिए बहुत मायने रखती है. आपके इस नेक व्यवहार से मैं बहुत प्रभावित हूं. मैं इस बात के लिए भी आपकी आभारी हूं कि आपने इस घटना का तुरंत संज्ञान लिया और केंद्रीय जांच एजेंसियों को जांच में महाराष्ट्र पुलिस के साथ तालमेल बिठाने के निर्देश दिए.

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महिला आरक्षण पर समर्थनSAD ने चंडीगढ़ में 8 अगस्त को अपने वरिष्ठ नेताओं की बैठक में महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग की. पार्टी चीफ सुखबीर सिंह बादल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि शिरोमणि अकाली दल सिख गुरुओं की शिक्षाओं से प्रेरणा लेता है, जिन्होंने महिलाओं की गरिमा, समानता और समान अधिकारों का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) ने अपने सदन में महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान करके पहले ही एक उदाहरण स्थापित कर दिया है.

शिरोमणि अकाली दल ने सरकार द्वारा सदन में सभी राज्यों की सीटों में एक समान 50 प्रतिशत की वृद्धि के प्रस्ताव का समर्थन किया. बादल ने पोस्ट में कहा कि पार्टी ने इस बात पर जोर दिया है कि महिलाओं के लिए आरक्षण और परिसीमन तुरंत किया जाना चाहिए.

बादल और मोदी की मुलाकातइससे पहले सुखबीर बादल ने 7 अगस्त, 2026 को नई दिल्ली में संसद भवन परिसर स्थित प्रधानमंत्री के कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. हालंकि दोनों दलों के नेताओं ने विचार-विमर्श के बारे में चुप्पी साध रखी है, लेकिन अटकलें तेज हैं कि दोनों दल फिर से गठबंधन कर सकते हैं.

बीजेपी और अकाली दल का लंबा गठबधनबीजेपी और अकाली दल का गठबंधन (1990 के दशक से शुरू हुआ) पंजाब की राजनीति के सबसे लंबे गठबंधनों में से एक था. दोनों के बीच सीटों का बंटवारा भी एक तरह से तय फार्मूले पर चलता था. अकाली दल ग्रामीण और सिख मतदाताओं के बीच मजबूत था तो वहीं बीजेपी का प्रभाव मुख्य रूप से शहरी हिंदू मतदाताओं में था. कृषि कानूनों (2020) ने इस समीकरण को तोड़ दिया. पंजाब में किसान आंदोलन का गहरा असर हुआ. अकाली दल पर पारंपरिक ग्रामीण और किसान वोटरों ने दबाव बढ़ाया और आखिरकार पार्टी ने बीजेपी से अलग होने का फैसला किया.

2022 चुनाव में हुआ था बुरा हालजिसका नतीजा यह रहा कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में दोनों ही पार्टियां पिछड़ती चली गईं. आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर सत्ता पर कब्जा कर लिया तो वहीं अकाली दल और बीजेपी महज 2-2 सीटों पर सिमट गईं. ऐसे में सामने 2027 का विधानसभा चुनाव है और दोनों पार्टियां एक बार फिर से गठबंधन के मूड में हैं. हालांकि ये अभी देखना होगा कि इस बार अगर गठबंधन होता है तो वो किन शर्तों पर होगा.

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