नई दिल्ली: आज दीवाली है और देशभर में इसे धूमधाम से मनाया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दीवाली के अवसर पर केदारनाथ धाम में पूजा-अर्चना की. नरेंद्र मोदी जब से प्रधानमंत्री बने हैं, तब से वह सेना के जवानों के साथ दीवाली मनाते आ रहे हैं. अपने इस परंपरा को जारी रखते हुए इस बार भी उन्होंने दीवाली जवानों के साथ मनाई. पीएम मोदी ने आज सुबह उत्तराखंड में भारत-चीन सीमा के पास हर्षिल में इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) और सेना के जवानों के संग दीवाली मनाई.

पीएम ने 11 हजार फुट की ऊंचाई पर मौजूद सेना के बेस पर सेना प्रमुख और आईटीबीपी के डीजी से मुलाकात करने के बाद जवानों के साथ दीवाली मनाई. उनके साथ कुछ वक्त बिताने के बाद पीएम मोदी केदारनाथ के लिए रवाना हो गए. प्रधानमंत्री बनने के बाद ये उनकी पांचवीं दीवाली है. जानिए इससे पहले उन्होंने अपनी दीवाली कब, कहां और किसके साथ मनाई थी.

सियाचिन, 23 October, 2014 बतौर प्रधानमंत्री ये नरेंद्र मोदी की पहली दीवाली थी. पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर के सियाचिन पहुंचकर जवानों के साथ दीवाली मनाई थी. 20 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद सियाचिन, दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र है, जहां तापमान शून्य से 50 डिग्री नीचे तक पहुंच जाता है. यहां हमारे वीर जवान पूरे साल तैनात रहते हैं. पीएम के वहां जाने से जवानों में एक नया जोश भर गया.

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर देशवासियों से कहा था- ''मैं हर भारतीय की ओर से जवानों के पास ये संदेश लेकर सियाचिन जा रहा हूं कि हम आपके साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर खड़े हैं!"

सियाचिन में पीएम मोदी ने जवानों से कहा, "मैं दीवाली के इस मौके पर खास आपसे मिलने आया हूं. मैं जानता हूं कि परिवार के साथ दीवाली मनाना कैसा लगता है. इसकी खुशी अलग ही होती है. मेरा यहां आना आपके परिवार की कमी पूरी तो नहीं कर सकता, लेकिन मैं यहां 125 करोड़ देशवासियों की तरफ से आया हूं और बताना चाहता हूं कि हम सभी को आप पर गर्व है." पीएम मोदी सियाचिन दौरे के बाद श्रीनगर में साल 2014 में आई बाढ़ से प्रभावित लोगों से भी मिले.

डोगराई वार मेमोरियल, अमृतसर, 11 नवंबर, 2015 पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल में पहली दीवाली जवानों संग मनाई थी. इसके बाद साल 2015 में भी 'वन रैंक वन पेंशन' के गर्म मुद्दे के बीच दीवाली मनाने के लिए प्रधानमंत्री जवानों के बीच पहुंचे थे. पीएम दीवाली के अवसर पर अमृतसर के खासा में स्थित डोगराई युद्ध स्मारक पहुंचे और वहां पुष्पांजलि अर्पित की थी.

खासा में पीएम मोदी ने जवानों के साथ वक्त बिताया और उनसे कहा, "मैं आपके साथ दीवाली मनाने आया हूं. आपके पराक्रम, समर्पण और सपनों की वजह से ही पूरी दुनिया भारत को सम्मान की नजर से देखती है. ये केवल वर्दी की वजह से नहीं, बल्कि सशस्त्र बलों के चरित्र के कारण है. मैं उन लोगों को बधाई देता हूं जिन्होंने इन वर्षों में सशस्त्र बलों को नेतृत्व प्रदान किया."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर 'बर्की युद्ध स्मारक' और 'असल उत्तर' का भी दौरा किया. पीएम ने असल उत्तर की लड़ाई के हीरो रहे वीर अब्दुल हमीद को श्रद्धांजलि भी दी थी. असल उत्तर मेमोरियल, असल उत्तर की लड़ाई का प्रतीक है.

किन्नौर, हिमाचल प्रदेश, 30 अक्टूबर, 2016 प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने लगातार दो दीवाली सेना के जवानों संग मनाई. इस क्रम को जारी रखते हुए अपने कार्यकाल की तीसरी दीवाली पर भी पीएम मोदी जवानों के साथ थे. इस बार प्रधानमंत्री दीवाली मनाने के लिए हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले पहुंचे थे. यहां उन्होंने इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी), भारतीय सेना और डोगरा स्काउट्स के जवानों के साथ समय बिताया.

जवानों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा था, "जब आप लोग देश की सीमा की रक्षा करते हैं तो आम लोग बिना डर के सो पाते हैं. अगर आप नहीं होंगे, तो लोग चैन से सो भी नहीं पाएंगे." प्रधानमंत्री ने इस मौके पर अचानक ही बिना किसी पूर्व सूचना के किन्नौर के 'चांगो' गांव की भी यात्रा की. उन्होंने गांव के लोगों और बच्चों के साथ समय भी बिताया.

गुरेज, जम्मू कश्मीर, 19 अक्टूबर, 2017 प्रधानमंत्री बनने के बाद से हर साल दीवाली पर जवानों के बीच पहुंचने वाले नरेन्द्र मोदी ने चौथी दीवाली भी उन्हीं के साथ मनाई. इस बार पीएम मोदी एलओसी पर नॉर्थ कश्मीर के गुरेज सेक्टर में जवानों के बीच दीवाली मनाने पहुंचे. इस मौके पर उनके साथ सेना प्रमुख बिपिन सिंह रावत, चीफ लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अन्बु और चिनार सुरक्षा कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जेएस संधु भी मौजूद थे. पीएम मोदी के जवानों के साथ इस दीवाली मिलन के कार्यक्रम को सुरक्षा के मद्देनजर पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था. उनके यहां पहुंचने के बाद ही ये खुलासा हो पाया कि इस बार पीएम गुरेज में मौजूद भारतीय जवानों के साथ दीवाली मना रहे हैं.

पीएम ने दीवाली के इस मौके पर जवानों से कहा, "लोग परिवार के साथ दीवाली मनाते हैं, ये जवान ही मेरा परिवार हैं. मैं पिछले 18 साल से दीवाली सीमा पर मनाता आया हूं. मैं सैनिकों के साथ वक्त गुजारता हूं तो मुझे एक नई ऊर्जा मिलती है."